नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड अलर्ट, वसुंधरा ताल में लगेगा अर्ली वॉर्निंग सिस्टम
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित वसुंधरा ताल में इस महीने सेंसर आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह प्रणाली ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद उत्तराखंड भी हिमनद झीलों को लेकर सतर्क हो गया है। इस कड़ी में ऐसी झीलों की निरंतर निगरानी रखने के साथ ही वहां अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाने की तैयारी है। चमोली जिले के वसुंधरा ताल में इसी माह केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) के सहयोग से सेंसर आधारित यह सिस्टम स्थापित कर दिया जाएगा।
इसके बाद सी-डेक (सेंटर फार डेवपलमेंट आफ एडवांस कंप्यूटिंग) भी इस हिमनद झील में इसी तरह का सिस्टम लगाएगा। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार वसुंधरा ताल के परिणाम के आधार पर अन्य हिमनद झीलों में भी इसी तरह का तंत्र विकसित किया जाएगा।
हिमनद झीलों की दृष्टि से उत्तराखंड भी काफी संवेदनशील है। राज्य में लगभग 344 ऐसी झीलें हैं। इनमें से 13 झीलों को वैज्ञानिक मानकों के आधार पर संभावित खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। यानी, ये कभी भी फटकर बड़ी आपदा का सबब बन सकती हैं।
संभावित आपदा से बचाव के दृष्टिगत कदम
नेपाल में आई इसी तरह की आपदा से सबक लेते हुए अब उत्तराखंड भी ऐसी संभावित आपदा से बचाव के दृष्टिगत कदम बढ़ा रहा है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि हिमनद झीलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के साथ ही इनमें अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
यह भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से पानीपत के टेक्सटाइल कारोबार को तगड़ा झटका, 450 करोड़ का व्यापार बाधित; नए ऑर्डर रुके
उन्होंने जानकारी दी कि सीबीआरआइ ने हिमनद झीलों के लिए सेंसर आधारित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम विकसित किया है। संस्थान को इसी माह वसुंधरा ताल में इसे स्थापित करने को कहा गया है। इसके माध्यम से झील के जल स्तर, वहां के मौसम समेत अन्य बिंदुओं पर नजर रखी जाएगी।
कोई भी खतरा होने पर इस तंत्र के माध्यम से जानकारी पहले ही मिल जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सी-डेक भी इसी तरह के सिस्टम पर काम कर रहा है। अगले माह तक वह भी वसुंधरा ताल में इसे स्थापित कर देगा।
