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उत्तराखंड में जीएसटी का शिकंजा, देहरादून सहित चार शहरों में 16 बिल्डरों पर एक साथ छापा

Published: Thu, 03 Sep 2026 10:40 AM (IST)

उत्तराखंड राज्य कर विभाग ने रियल एस्टेट सेक्टर में जीएसटी चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। देहरादून सहित चार ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड के रियल एस्टेट सेक्टर में जीएसटी हजम करने के खेल पर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) और अन्य जांच इकाइयों ने देहरादून समेत हरिद्वार, रुद्रपुर और हल्द्वानी के 16 बिल्डरों पर एक साथ छापा मारा। जिसमें मौके पर ही 7.73 करोड़ रुपये जमा कराए गए।

आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर यह कार्रवाई 16 टीमों में शामिल 55 अधिकारियों ने की। टीमों ने विभिन्न फर्मों के व्यावसायिक परिसरों से महत्वपूर्ण अभिलेख और कारोबारी रिकार्ड भी कब्जे में लिए हैं। विभाग का कहना है कि दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद कर देयता और सामने आ सकती है।

एक प्रतिशत और पांच प्रतिशत जीएसटी के बीच टैक्स बचाने का खेल

रियल एस्टेट कारोबार में किफायती आवास पर एक प्रतिशत जीएसटी, जबकि गैर-किफायती आवास/फ्लैट पर पांच प्रतिशत जीएसटी की दर लागू होती है। पांच प्रतिशत की इस व्यवस्था में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं लिया जा सकता।

विभाग की जांच में ऐसे तौर-तरीकों पर खास फोकस किया गया है, जिनमें आरोप है कि फ्लैट की पूरी या बड़ी रकम खरीदार से पहले ही ले ली जाती है, लेकिन रजिस्ट्री परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद कराई जाती है।

इसका मकसद यह दिखाना हो सकता है कि बिक्री कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बाद हुई, जिससे संबंधित लेनदेन पर जीएसटी देयता शून्य हो जाए। यानी पैसा पहले, रजिस्ट्री बाद में और बीच में कंप्लीशन सर्टिफिकेट। टैक्स बचाने के इस रास्ते की अब बारीकी से जांच हो रही है।

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अपनी ही निर्माण फर्म, फिर फर्जी खरीद से आईटीसी

जांच में बिल्डरों की ओर से अपनी ही निर्माण फर्में बनाकर परियोजनाओं का काम कराने के मामले भी सामने आए हैं। ऐसी निर्माण गतिविधियों पर 18 प्रतिशत जीएसटी देय होता है और निर्धारित परिस्थितियों में आइटीसी का लाभ लिया जा सकता है।

बिल्डर संबंधित निर्माण फर्मों से सिर्फ कागजों पर खरीद दिखाकर आइटीसी का गलत लाभ ले रहे थे। वास्तविक खरीद और दस्तावेजों में दिखाई गई खरीद के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है।

15 दिन तक जुटाई सूचना, फिर छापा

विभागीय स्तर पर रियल एस्टेट सेक्टर से अपेक्षित राजस्व प्राप्त न होने के कारण इस क्षेत्र का विश्लेषण किया गया। राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर बिल्डरों और उनसे संबंधित संविदाकार फर्मों की कारोबारी गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। नोडल अधिकारी एवं संयुक्त आयुक्त अजय कुमार के समन्वय में प्रदेश की प्रवर्तन इकाइयों से पिछले करीब 15 दिनों तक कारोबारियों के संव्यवहार से संबंधित इन्वेस्टिगेशन/इंफार्मेशन एकत्र की गई। 

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रिकार्ड कब्जे में, जांच जारी

जांच के दौरान विभिन्न फर्मों के परिसरों से अभिलेख और रिकार्ड कब्जे में लिए गए हैं। इनमें बिक्री, भुगतान, रजिस्ट्री, कंप्लीशन सर्टिफिकेट, निर्माण कार्य, खरीद और आईटीसी से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

राज्य कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिल्डरों और उनसे संबंधित संविदाकार फर्मों पर निगरानी जारी रहेगी और जांच आगे भी चलती रहेगी। दस्तावेजों की पड़ताल में यदि अतिरिक्त अनियमितता या कर चोरी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।