उत्तराखंड: जनवरी की बारिश और बर्फबारी से सूखी धरती को मिली राहत
जनवरी 2026 में उत्तराखंड में तीन माह के सूखे के बाद वर्षा और बर्फबारी से राहत मिली। यह चार साल में पहली बार हुआ जब जनवरी में सामान्य से अधिक वर्षा दर् ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
तीन माह के सूखे के बाद जनवरी में वर्षा-बर्फबारी
चार साल बाद सामान्य से अधिक जनवरी वर्षा दर्ज
खेती-किसानी और जलस्रोतों को मिली बड़ी राहत
विजय जोशी, जागरण देहरादून। वर्ष 2026 के पहले ही महीने में मौसम ने उत्तराखंड पर मेहरबानी दिखाई। तीन माह के लंबे इंतजार के बाद जनवरी में प्रदेश में वर्षा और बर्फबारी के दौर लौटे, जिससे न केवल मौसम का मिजाज बदला, बल्कि खेती-किसानी और जलस्रोतों को भी बड़ी राहत मिली।
चार साल बाद ऐसा हुआ है, जब जनवरी में प्रदेश में सामान्य या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई। नवंबर और दिसंबर के सूखे गुजरने के बाद जनवरी की बारिश-बर्फबारी ने मौसम को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।
हालांकि, जनवरी माह में ज्यादातर दिन शुष्क रहे और तेज धूप के चलते अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा, लेकिन अंतिम 10 दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जोरदार वर्षा और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। इससे वातावरण में ठंडक लौटी और रबी फसलों के लिए अनुकूल हालात बने।
खासकर 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में इस माह तीन से चार दौर की बर्फबारी दर्ज की गई, जो बीते चार वर्षों में सर्वाधिक मानी जा रही है।
मौसम विभाग की मासिक जनपदवार रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में प्रदेश में औसत वर्षा सामान्य से करीब तीन प्रतिशत अधिक रही, हालांकि वर्षा का वितरण असमान रहा।
बागेश्वर में सर्वाधिक 73.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 110 प्रतिशत अधिक रही। नैनीताल में 59.2 मिमी वर्षा के साथ 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जबकि अल्मोड़ा में 52.4 मिमी वर्षा सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक रही।
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राजधानी देहरादून में 53.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो औसत से 16 प्रतिशत अधिक रही। वहीं, कुछ पर्वतीय जिलों में वर्षा अपेक्षा से कम रही।
टिहरी गढ़वाल में 35.8 मिमी वर्षा के साथ 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पौड़ी गढ़वाल में 28.7 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 21 प्रतिशत कम रही।
पिथौरागढ़ में वर्षा 26 प्रतिशत कम दर्ज की गई, जबकि रुद्रप्रयाग में 18 प्रतिशत और चमोली में 12 प्रतिशत की कमी रही। मैदानी जिलों में वर्षा का असर अपेक्षाकृत बेहतर रहा।
हरिद्वार में 29.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो औसत से 15 प्रतिशत अधिक रही, जबकि ऊधमसिंह नगर में 25.2 मिमी वर्षा के साथ 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उत्तरकाशी में वर्षा लगभग सामान्य रही और मात्र दो प्रतिशत की कमी रिकार्ड की गई।