उत्तराखंड के मदरसों को आरटीई के लाभ के लिए लेनी होगी अलग मान्यता, सरकार वहन करेगी फीस
उत्तराखंड के मदरसों को आरटीई का लाभ लेने के लिए अब अलग से मान्यता प्राप्त करनी होगी और इन्वेस्ट पोर्टल पर आवेदन करना होगा। ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के 456 मदरसों में से स्कूल के रूप में संचालित होने वाले मदरसे अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित होंगे। हालांकि, इन संस्थानों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत मिलने वाले लाभ स्वतः नहीं मिलेंगे।
यदि कोई मदरसा स्कूल निजी विद्यालयों की तरह आरटीई योजना का लाभ लेना चाहता है तो उसे अलग से मान्यता प्राप्त करनी होगी। इसके लिए संबंधित संस्थान को राज्य के इन्वेस्ट पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य होगा।
सभी मानकों को करना होगा पूरा
प्राधिकरण के तहत पंजीकरण केवल अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के रूप में संचालन की अनुमति देगा। आरटीई के अंतर्गत संस्थान को अधिनियम में निर्धारित सभी मानकों को पूरा करना होगा।
पोर्टल के माध्यम से मान्यता मिलने के बाद ही ऐसे स्कूल आरटीई में मिलने वाली सुविधाओं के पात्र बनेंगे। शिक्षा विभाग का कहना है कि आरटीई के सभी प्रविधानों का पालन करने वाले संस्थानों को ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त कर आरटीई के दायरे में आने वाले मदरसा स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र बच्चों के लिए आरक्षित करनी होंगी। यदि किसी संस्थान में 100 छात्र हैं तो 25 छात्रों को आरटीई के तहत प्रवेश देना होगा। इन विद्यार्थियों की पहली से आठवीं कक्षा तक की फीस राज्य सरकार वहन करेगी।
लाटरी से होगा स्कूलों का आवंटन
आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों को समग्र शिक्षा के पोर्टल पर सूचीबद्ध किया जाएगा। पात्र बच्चों के अभिभावक अपनी पसंद के स्कूलों के लिए आवेदन करेंगे। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लाटरी के माध्यम से विद्यार्थियों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे।
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निजी स्कूलों की तरह मदरसा स्कूलों को भी आरटीई के लिए उत्तराखंड इन्वेस्ट पोर्टल पर आवेदन करना होगा। मान्यता मिलने के बाद ही आरटीई के तहत सीटों का आवंटन किया जाएगा। - केएस रावत, निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा
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