उत्तराखंड खनन विभाग ने 1500 करोड़ के राजस्व का रखा लक्ष्य, अवैध खनन पर कसेगा शिकंजा
उत्तराखंड खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1500 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। अवैध खनन पर शिकंजा कसने के साथ डिजिटल निगरानी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
खनन विभाग का 2026-27 के लिए 1500 करोड़ राजस्व लक्ष्य।
अवैध खनन और परिवहन पर होगी सख्त डिजिटल निगरानी।
250 करोड़ रुपये की लंबित बकाया राशि की वसूली।
विकास गुसाईं, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में खनन से आय बढ़ाने के लिए इस बार विभाग ने आक्रामक रणनीति तैयार की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनन विभाग ने 1500 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। लक्ष्य हासिल करने के लिए अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
साथ ही डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए नए खनन लाटों के आवंटन के साथ ई-गेट प्रणाली का विस्तार किया जाएगा तथा ई-चालानों की समयबद्ध वसूली सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में खनन राजस्व के बड़े स्रोतों में से एक है। विभाग लगातार राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इस बार विभाग को जोर राजस्व बढ़ाने के लिए केवल नए स्रोतों पर ही नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित बकाया राशि की वसूली पर भी रहेगा।
इसके तहत करीब 250 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि की वसूली के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किए जाएंगे। इससे विभाग को लंबित राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। खनन क्षेत्रों में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रांसफार्मेशन पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
ई-गेट, ई-रवन्ना और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिजों के परिवहन की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। बिना वैध अनुमति के खनिज परिवहन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों से जुर्माने की वसूली भी तेज की जाएगी।
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नए खनन लाटों के संचालन, डिजिटल निगरानी प्रणाली और बकाया वसूली अभियान के संयुक्त प्रभाव से राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। निदेशक खनन राजपाल लेघा का कहना है कि हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में राजस्व लक्ष्य बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
सभी जिला खान अधिकारियों को इसके लिए अभी से कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए राजस्व लक्ष्य की नियमित समीक्षा की जाएगी और प्रत्येक जनपद में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति पर नजर रखी जाएगी।
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