उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए बनेगी नई Arms Policy, कैबिनेट में रखेंगे प्रस्ताव
उत्तराखंड सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए नई शस्त्र नीति तैयार कर रही है। ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के हितों को ध्यान में रखते हुए नई शस्त्र नीति तैयार करने जा रही है। इसके तहत पूर्व सैनिकों के लिए शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। इसमें पुलिस सत्यापन जैसी प्रक्रिया से भी राहत देने की तैयारी है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं। जल्द ही सेना में अग्निपथ योजना के तहत अपनी सेवाएं देने वाले अग्निवीर भी घर वापसी करेंगे। ऐसे में उनके रोजगार और उनकी सुरक्षा के दृष्टिगत उन्हें शस्त्र रखने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए नई शस्त्र नीति बनाई जा रही है।
इन सैनिकों को शस्त्र चलाने व इसे संभाल कर रखने का पहले से ही अनुभव होता है, ऐसे में उन्हें कई राहत दी जा सकती हैं।
बार-बार होने वाले सत्यापन की प्रक्रिया से रखा जाएगा बाहर
प्रस्तावित नीति के अनुसार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को शस्त्र लाइसेंस के लिए बार-बार होने वाले पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा।
उनकी सैन्य सेवा का रिकॉर्ड और संबंधित यूनिट के कमांडिंग अधिकारी (सीओ) द्वारा जारी प्रमाण पत्र ही शस्त्र लाइसेंस प्रदान करने का प्रमुख आधार बनेगा। इससे लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही सैनिकों को प्रशासनिक परेशानियों से भी राहत मिलेगी। कारण यह कि सेना से प्रशिक्षित होकर लौटने वाले जवान पहले से ही कठोर सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजर चुके होते हैं।
यह पहल पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के सम्मान तथा उनके योगदान को औपचारिक मान्यता के रूप में भी देखी जा रही है। नीति को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सचिव गृह शैलेश बगौली का कहना है कि इस पर अभी कार्य चल रहा है।