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    उत्तराखंड सरकार का Forest Fire रोकने का दमदार प्लान, आग बुझाने वालों को मिलेंगे इनाम

    Updated: Wed, 27 May 2026 10:44 AM (IST)

    वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि उत्तराखंड सरकार वनाग्नि नियंत्रण के लिए गंभीर है और हर जिले में निजी व सरकारी स्तर पर तीन-तीन पुरस्कार देगी। ...और पढ़ें

    वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार हर जिले में निजी व सरकारी स्तर पर दिए जाएंगे तीन पुरस्कार। फाइल फोटो

    वन मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार हर जिले में निजी व सरकारी स्तर पर दिए जाएंगे तीन पुरस्कार। फाइल फोटो

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    राज्य ब्यूरो, देहरादून। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वनों में अग्नि नियंत्रण के लिए सरकार पूरी गंभीरता से कदम उठा रही है। अग्नि नियंत्रण में जनसमुदाय की भागीदारी पर विशेष जोर दिया रहा है। इसी क्रम में ग्राम स्तर पर गठित 496 वनाग्नि प्रबंधन समितियों को 30-30 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।

    इसके साथ ही सरकारी व निजी स्तर पर वनों को आग से बचाने में उल्लेखनीय योगदान देने समूहों व व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जिले में दोनों श्रेणियों में तीन-तीन पुरस्कार दिए जाएंगे, जिसमें एक लाख, 75 हजार व 50 हजार रुपये धनराशि प्रदान की जाएगी।

    अभी तक 3500 से ज्यादा जागरूकता शिविर आयोजित

    वन मंत्री उनियाल ने कहा कि कोविडकाल में वनों में आग की घटनाएं न्यूनतम रहीं। अध्ययन कराया गया तो बात सामने आई कि आग का ज्यादातर कारण मानवजनित है। इसे देखते हुए जनजागरूकता पर विशेष बल दिया जा रहा है और राज्य में अभी तक 3500 से ज्यादा जागरूकता शिविर आयोजित किए जा चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि विषम भूगोल के चलते रिस्पांस टाइम बड़ी समस्या है। ऐसे में वनकर्मियों के मौके पर पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोग तत्काल आग बुझाने में जुट जाएं तो इससे बड़ी राहत मिलेगी।

    आग बुझाने में जुटे हैं 11,650 कर्मी

    वन मंत्री ने बताया कि जंगलों में अग्नि नियंत्रण के लिए 11,650 कर्मी दिन-रात जुटे हैं। इनमें 6025 विभागीय कार्मिक और 5625 फायर वाचर हैं। इसके साथ ही हर जिले में वरिष्ठ अफसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

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    पिरुल को आजीविका से जोड़ा

    जंगलों में आग के फैलाव का बड़ा कारण पिरुल यानी चीड़ की सूखी पत्तियां हैं। इन्हें आजीविका से जोड़ा गया है। वन मंत्री ने कहा कि पिरुल एकत्रीकरण के लिए अब ग्रामीणों को दो के स्थान पर 10 रुपये प्रति किग्रा की दर से भुगतान हो रहा है। इस वर्ष 8555 टन पिरुल एकत्रीकरण का लक्ष्य रखा गया है।

    पिरुल से ब्रिकेट बनाने की इकाइयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में नौ इकाइयां संचालित हैं। पिरुल के अन्य उपयोग के दृष्टिगत केंद्र सरकार के स्तर पर भी बातचीत चल रही है। इसके अलावा 11217 वन पंचायतों में जड़ी-बूटी व सगंध खेती के दृष्टिगत 628 करोड़ का हर्बल मिशन चल रहा है।

    14 प्रतिशत अलर्ट ही जंगल की आग के

    उन्होंने कहा कि वन विभाग को भारतीय वन सर्वेक्षण से निरंतर फायर अलर्ट मिल रहे हैं। इस बार 15 फरवरी से 24 मई तक 3769 अलर्ट मिले, जिनमें से 14 प्रतिशत ही जंगल की आग के थे। आग की घटनाओं के क्रम में पिछले साल उत्तराखंड देश में 14वें स्थान पर था।

    यात्राकाल के बाद रुद्रनाथ ट्रेक पर जाने की अनुमति नहीं

    एक प्रश्न पर वन मंत्री ने कहा कि रुद्रनाथ ट्रेक पर यात्राकाल के दौरान ही सीमित समय में लोग जाते हैं। यात्राकाल खत्म होने के बाद वहां जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि पौड़ी प्रभाग में कार्मिकों की कोई कमी नहीं है।

    विभागीय पुनर्गठन पर उन्होंने कहा कि इसमें व्यावहारिकता भी देखी जाएगी। पत्रकार वार्ता में वन विभाग के मुखिया पीसीसीएफ आरके मिश्र, मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन सुशांत पटनायक समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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