Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    उत्तराखंड में सड़कों की बदलेगी सूरत: अगले 5 सालों में खर्च होंगे 74 हजार करोड़, लोनिवि ने बनाया मास्टर प्लान

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 06:00 AM (IST)

    उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग ने अगले पांच वर्षों के लिए 74,100 करोड़ रुपये का मास्टर प्लान जारी किया है। इसमें 5,735 किमी कच्ची सड़कों को पक्का करने पर ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड तस्वीर

    एआई जेनेरेटेड तस्वीर

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    अश्वनी त्रिपाठी, जागरण, देहरादून। लोक निर्माण विभाग ने मास्टर प्लान जारी कर बताया कि उत्तराखंड में सड़क व बुनियादी ढांचे के विकास पर आगामी पांच वर्षों में कुल 74,100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गांवों तक जा रही कच्ची सड़कों को पक्का करने और शहरों को जाम मुक्त बनाने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर सर्वाधिक बजट खर्च होगा।

    गांवों की 5,735 किमी कच्ची सड़कों को पक्का करने पर 55,000 करोड़ रुपये व शहरी यातायात सुधार के लिए 12,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पर्यटन-आर्थिक हब विकास पर 1,350 करोड़, नए पुलों के निर्माण पर 1,500 करोड़ और सड़क सुरक्षा पर 4,250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    लोनिवि ने मास्टर प्लान को छह हिस्सों में बांटकर कनेक्टिविटी, सुरक्षा, शहरी विकास और आधुनिक तकनीक को केंद्र में रखा है। प्रथम चरण में कच्ची सड़कों को पक्का करने पर जोर दिया है, इसके तहत वर्ष 2031 तक 5,735 किमी सड़कों का डामरीकरण कर लगभग 8.24 लाख लोगों को लाभ पहुंचाया जाएगा।

    दूसरे चरण में आर्थिक विकास के लिए पर्यटन व औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत की जाएगी। कुमाऊं में मानसखंड मंदिर माला मिशन के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जबकि टिहरी झील के आसपास लेक रिंग रोड को एडवेंचर टूरिज्म का केंद्र बनाया जाएगा।

    खबरें और भी

    उधम सिंह नगर के औद्योगिक हब व अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मजबूत की जाएगी। राज्य के 1200 क्लास-बी पुलों को क्लास-ए में अपग्रेड और 91 जर्जर पुलों की मरम्मत की जाएगी। जीरो ट्राली मिशन के तहत वर्ष 2030 तक ट्रॉली सिस्टम समाप्त कर स्थायी पुल बनाए जाएंगे।

    सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देकर भूस्खलन क्षेत्रों का उपचार किया जाएगा। शहरी सड़कों का आधुनिकीकरण होगा। देहरादून में रिस्पना-बिंदाल क्षेत्र में एलिवेटेड कारिडोर, रिंग रोड और टनल आधारित बाईपास बनाकर ट्रैफिक दबाव कम किया जाएगा। अंतिम चरण में नवाचार को बढ़ावा देने की पैरोकारी की गई है।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: रोडवेज बसों में 30 प्रतिशत यात्रियों की हुई बढ़ोतरी