UCC में मैरिज रजिस्ट्रेशन होगा और आसान, नियमावली में किया जा रहा नया बदलाव
उत्तराखंड सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के तहत विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र में विवरण संशोधन की व्यवस्था कर रही है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विकास गुसाईं, देहरादून। प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लगातार आमजन के लिए सरल व सुगम बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस कड़ी में अब यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र में दर्ज विवरण में बदलाव किया जा सकेगा। अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं थी। इसके लिए नियमावली में संशोधन किया जा रहा है।
प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मार्च, 2010 के बाद हुए विवाह का अनिवार्य पंजीकरण कराया जाना जरूरी है। इसके तहत प्रदेश में अब सभी विवाह यूसीसी के तहत ही पंजीकृत किए जा रहे हैं। यही विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र संपत्ति समेत अन्य दस्तावेजों में इस्तेमाल हो रहे हैं।
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विवाह पंजीकरण में गलत जानकारी
इस समय गृह विभाग के पास ऐसी कई आवेदन आए हैं जिनमें आवेदकों ने विवाह पंजीकरण में गलत जानकारी प्रकाशित होने का हवाला देते हुए इसमें संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि इसमें माता-पिता अथवा पते में आवेदन करते हुए गलती हुई थी। इस कारण पंजीकरण में भी गलत तथ्य आ रहे हैं, इस कारण उनके अहम कार्य अटक रहे हैं। ऐसे में गृह विभाग अब पंजीकरण में संशोधन की व्यवस्था करने जा रहे हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, विवाह पंजीकरण में बदलाव चाहने वाले आवेदक को पहले पंजीकरण निरस्त करने के लिए आवेदन करना होगा। आवेदन में यह स्पष्ट करना होगा कि प्रमाण पत्र में किस विवरण में और किस कारण से बदलाव आवश्यक है। इसके साथ संबंधित प्रमाण और आवश्यक दस्तावेज भी देने होंगे।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुराने पंजीकरण को निरस्त किए जाने के बाद आवेदक को नए सिरे से विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। दस्तावेजों की जांच के बाद नियमानुसार नए पंजीकरण की अनुमति मिलेगी। सचिव गृह शैलेश बगौली ने कहा कि इस संशोधन पर कार्य चल रहा है।
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पहले भी हो चुके हैं कई बदलाव
- उत्तराखंड में यूसीसी नियमावली जनवरी, 2025 में लागू हुई थी। इसके बाद इसमें लगातार संशोधन किए गए हैं।
- इसके तहत रजिस्ट्रार जनरल को नियमों के उल्लंघन या फर्जीवाड़े पर विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को रद्द करने का अधिकार दिया गया है।
- नियमों का उल्लंघन करने, विवाहित होने, धर्म अथवा अन्य जानकारी छुपाने या अवैध रूप से रहने पर अर्थदंड के साथ-साथ कारावास का प्रविधान किया गया है।
- साथ ही पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता के स्थान पर नए केंद्रीय कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों को इसमें जोड़ा गया।
