धामी सरकार के जेंडर बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, ₹19.6 हजार करोड़ से संवर रहा महिलाओं का भविष्य
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, सुरक्षा और नीति-निर्माण में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। जेंडर बजट ...और पढ़ें

HighLights
जेंडर बजट में रिकॉर्ड वृद्धि, कुल बजट का 17% से अधिक।
लखपति दीदी योजना से 2.65 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर।
यूसीसी और 30% आरक्षण ने महिलाओं को कानूनी सुरक्षा दी।
डिजिटल टीम, देहरादून। उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक संरचना में मातृशक्ति हमेशा से रीढ़ की हड्डी रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, सुरक्षा और नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए चौतरफा प्रयास शुरू किए हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में जेंडर बजट का हिस्सा बढ़ाकर कुल बजट का लगभग 17% से अधिक कर दिया गया है। सरकारी नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण को कानूनी रूप देने और देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने जैसे बड़े फैसलों ने देवभूमि की महिलाओं को एक सुरक्षित और समान अधिकार संपन्न माहौल प्रदान किया है।
लखपति दीदी योजना: 2.65 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं की आय ₹1 लाख पार
ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए यह योजना गेमचेंजर साबित हुई है। महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, लोन और उनके स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग व मार्केटिंग के लिए सरकार आर्थिक मदद दे रही है। राज्य सरकार के प्रयासों से अब तक प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक लखपति दीदियों की सालाना आय ₹1 लाख से अधिक हो चुकी है। अब इसे और आगे ले जाने के लिए महिलाओं को 'ड्रोन दीदी' और 'महक क्रांति' (सुगंधित पौधों की खेती) से जोड़ा जा रहा है।
नंदा गौरा योजना: बेटी के जन्म से लेकर 12वीं पास होने तक ₹62,000 की मदद
बालिका लिंगानुपात को सुधारने और बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए यह सरकार की फ्लैगशिप योजना है। इस योजना के लिए सरकार ने ₹220 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। इसके तहत पात्र परिवार में बेटी के जन्म पर ₹11,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं, बेटी के अविवाहित रहते हुए 12वीं कक्षा पास करने पर ₹51,000 की दूसरी किस्त सीधे बैंक खाते (DBT) में ट्रांसफर होती है। इससे राज्य में ड्रॉप-आउट रेट काफी कम हुआ है।
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना: संकट में बनी लाठी
विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता या 40 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित महिलाओं को समाज में सम्मानजनक आजीविका देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। एकल महिलाओं को खुद का उद्योग, कुटीर उद्योग या व्यापार शुरू करने के लिए ₹1 लाख तक का गैर-वापसी अनुदान दिया जा रहा है। पहाड़ी जिलों की हजारों महिलाएं इस योजना का लाभ उठाकर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं।
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ईजा-बोई शगुन योजना: प्रसूताओं को संबल
गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य व पोषण को ध्यान में रखते हुए इस योजना के लिए ₹122 करोड़ का बड़ा बजटीय प्रावधान किया गया है। अस्पताल में डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए प्रसूता महिलाओं को शगुन के रूप में आर्थिक सहायता और 'मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट' प्रदान की जाती है। इस किट में मां और नवजात शिशु के लिए जरूरी कपड़े व पोषण सामग्री होती है। इसी का परिणाम है कि उत्तराखंड में संस्थागत प्रसव 61% से बढ़कर 97% के पार पहुंच चुका है।
मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना
महिला समूहों के स्टार्टअप और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इस योजना के तहत ₹5 लाख तक का ब्याज रहित लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही हर विकासखंड में स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष मंच और बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण महिलाओं को उनके उत्पादों का सही मूल्य मिल सके।
कानूनी अधिकार और सुरक्षा का 'उत्तराखंड मॉडल'
आर्थिक योजनाओं के साथ-साथ धामी सरकार ने नीतिगत मोर्चे पर भी इतिहास रचा है। उत्तराखंड की मूल निवासी महिलाओं को राज्य की सरकारी सेवाओं में 30% आरक्षण का पक्का कानूनी अधिकार दिया गया। नवनिर्मित राज्य महिला नीति के तहत सहकारी समितियों में महिलाओं के लिए 33% पद आरक्षित किए गए हैं। यूसीसी लागू होने से महिलाओं को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार, विवाह के अनिवार्य पंजीकरण और भरण-पोषण जैसे मामलों में बड़ी कानूनी सुरक्षा मिली है।