देहरादून: पुलिस की लापरवाही से नहीं मिला इंसाफ, अपहरण-दुष्कर्म मामले में छह आरोपी बरी
विकासनगर में 13 वर्षीय किशोरी के अपहरण, मानव तस्करी और जबरन शादी के मामले में अदालत ने सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। ...और पढ़ें

13 साल की किशोरी के अपहरण, मानव तस्करी और अधेड़ से जबरन शादी कराने का मामला। प्रतीकात्मक

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जागरण संवाददाता, देहरादून। विकासनगर थानाक्षेत्र से एक 13 साल की नाबालिग का अपहरण करके एक अधेड़ उम्र के शख्स से जबरन शादी कराने और दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में अदालत ने सभी छह आरोपितों को बरी कर दिया।
पीड़िता ने आरोपितों के खिलाफ अदालत में विस्तार से गवाही दी थी, लेकिन पुलिस जांच में गंभीर खामियों के कारण अभियोजन पक्ष आरोपितों का दोष सिद्ध करने में नाकाम रहा। हैरानी की बात है कि जिस कार से पीड़िता को अगवा किया गया, पुलिस ने उस कार को भी विवेचना में शामिल ही नहीं किया था।
जिला एवं सेशन जज (पोक्सो) रजनी शुक्ला ने बुधवार को सुकरमपाल, सुनील, शशि, लक्ष्मी, संदीप और सविता को बरी करने का फैसला सुनाया। पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर 2020 को विकासनगर क्षेत्र से 13 साल की किशोरी लापता हो गई थी। पीड़िता ने बयान दिया कि वह खेतों में शौच के लिए गई थी, जहां पड़ोसी शशि ने उसे घास उठवाने के बहाने बुलाया और मुंह पर रुमाल रखकर बेहोश कर दिया।
उसे अपहरण करके कार से सहारनपुर ले गए और एक साल तक बंधक बनाकर रखा गया।आरोप है कि महिला आरोपित अन्य आरोपियों का साथ देती थीं। बाद में अधेड़ उम्र के संदीप को बेचकर जबरन शादी करा दी गई, जिसने उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया।
पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को किया नजरंदाज
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस जांच पर सवाल उठे। बचाव पक्ष की जिरह में पता चला कि जांच अधिकारी एसआई नीमा रावत ने मानव तस्करी के मामले में पीड़िता के कथित बयान के अलावा अन्य कोई साक्ष्य नहीं जुटाया, न ही आरोपितों की काल डिटेल्स और आपसी बातचीत के संबंध में कोई साक्ष्य प्राप्त किया।
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किशोरी को बेचने के संबंध में रुपयों के लेन-देन के साक्ष्य नजरंदाज किए। अपहरण में इस्तेमाल कार को विवेचना में शामिल ही नहीं किया।मेडिकल साक्ष्य में बंधक बनाने के लिए मारपीट के आरोप की भी पुष्टि नहीं हुई। चिकित्सक दुष्कर्म के संबंध में कोई निश्चित राय नहीं दे सकीं।