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    होर्मुज से लौटे उत्तराखंड के कैप्टन आशीष, बोले- सिर के ऊपर से गुजरते थे ड्रोन, दहशत में कटी 65 रात

    Updated: Wed, 06 May 2026 10:16 AM (IST)

    रुड़की के कैप्टन आशीष शर्मा ने हार्मुज में 65 दिन बिताने के बाद अपने भयावह अनुभव साझा किए, जहां उन्हें ड्रोन और मिसाइलों के खतरे के बीच रहना पड़ा। ...और पढ़ें

    परिवार के साथ कैप्टन आशीष शर्मा। स्वयं

    परिवार के साथ कैप्टन आशीष शर्मा। स्वयं

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    जागरण संवाददाता, रुड़की। सिर के ऊपर से कभी ड्रोन गुजरते थे तो कभी तेजी से मिसाइल गुजरती थी। कभी कहीं पर धमाकाता होता तो कई बार पानी में विस्फोट होने से जहाज हिलने लगता। कई रात तो दहशत में कटी लेकिन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार चौकन्नी थी।

    इस कारण उनका जहाज बंदरगाह पर सुरक्षित रहा। शुरू में तो घर वालों से फोन पर बात होती थी। फिर वीडियो काल होने लगी, लेकिन सुरक्षा के दृष्टिगत बाद में फोन काल बंद हो गए। इसके बाद सुबह-शाम वह परिवार को आल ओके का मैसेज लिखकर भेज देते थे।

    हार्मुज में 65 दिन तक फंसे रुड़की के दिल्ली रोड निवासी कैप्टन आशीष शर्मा ने घर लौटकर पश्चिमी एशिया संकट के दौरान दहशत के उन पलों को साझा किया।

    तेल लेकर आना था भारत 

    सोमवार आधी रात रुड़की पहुंचे कैप्टन शर्मा ने बताया कि उन्होंने 18 जनवरी को जहाज पर बतौर कैप्टन जिम्मेदारी संभाली। उन्हें तेल लेकर भारत आना था। उनका जहाज हार्मुज के नजदीक पहुंच गया। इसके बाद कभी जहाज के ऊपर से ड्रोन गुजरते थे तो कभी मिसाइल आवाज करते हुए निकल जाती थी। हालांकि उनके जहाज पर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।

    उन्होंने बताया कि उनसे करीब 50 किमी दूर एक जहाज पर अटैक हुआ था, जिसकी जबरदस्त हलचल पानी में भी हुई थी। जहाज कांप गया था। इसके बाद तो वह कई रात सो नहीं पाए। हर समय दहशत बनी रही, हालांकि उस हमले से यूएई सरकार भी चौकन्नी हो गई।

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    बंदरगाह पर जहाज को लगा दिया गया और अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम किए गए। इसके बाद कुल 24 सदस्यों में से 12 सदस्यों को तो उन्होंने भेज दिया, खुद 12 सदस्यों के साथ डटे रहे। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले वह और तीन अन्य सदस्य जहाज की ड्यूटी पूरी करने के बाद दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे। सोमवार देर रात वह घर पर आ गए।

    कैप्टन आशीष शर्मा ने बताया कि बंदरगाह पर अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। अब युद्ध विराम के चलते उनकी टीम के 24 सदस्यों में से 12 को भेज दिया गया। 12 सदस्य अभी वहीं डटे हैं। तीन दिन पहले उनके समेत चार अन्य सदस्य दुबई के रास्ते दिल्ली पहुंचे और सोमवार देर रात वह घर पर आ गए हैं।

    दिन भर क्रू मेंबर को प्रोत्साहित करते थे

    कैप्टन आशीष शर्मा ने बताया कि वह जहाज पर मौजूद सभी सदस्यों को प्रोत्साहित करते रहते थे। कभी उनसे बात करते तो कभी उनके परिवार के सदस्यों से भी बात करते थे। सभी को भरोसा दिलाते, वे सुरक्षित घर जाएंगे। क्रू मेंबर में नाइजरिया, श्रीलंका और भारत के नागरिक थे।

    होली के रंग भी रहे फीके

    आशीष शर्मा की पत्नी सरूनिका ने बताया कि इस बार होली के रंग उनके लिए फीके रहे। उस दौरान पति की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं, हालांकि पति हर दिन कहते कि सब कुछ अच्छा होगा। दोनों बेटियां भी टीवी पर युद्ध और हार्मुज से संबंधित खबरें देखती रहती थीं।

    हालांकि बाद में उन्होंने टीवी देखना बंद कर दिया था और गुमशुम रहने लगी थीं। पिता की वापसी से उनके चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। अब ईश्वर की कृपा एवं पति के साहस की वजह से उनके घर पर खुशियां लौटी है। रिश्तेदारों का उनके घर तांता लगा हुआ है।

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