Chaitra Navratri 2026: तिथियों के घटने-बढ़ने से 8 दिन के होंगे नवरात्र, अष्टमी एवं नवमी का संयोग एक ही दिन
Chaitra Navratri 2026 इस बार चैत्र नवरात्र 2026 में तिथियों के घटने-बढ़ने से आठ दिन के होंगे, जिसमें अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ेगी। ...और पढ़ें

Chaitra Navratri 2026 सांकेतिक तस्वीर।

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जागरण संवाददाता, रुड़की। Chaitra Navratri 2026 नवरात्र पर इस बार मां दुर्गा का पालकी में आगमन एवं गमन होगा। वहीं, तिथियों के घटने-बढ़ने से नवरात्र आठ दिन के होंगे। ऐसे में अष्टमी एवं नवमी का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है।
मां दुर्गा के नवरात्र 19 मार्च से प्रारंभ हो रहे हैं। गुरुवार का दिन, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तथा शुक्ल योग का अद्भुत संयोग पड़ रहा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की परिसर स्थित श्री सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि वर्ष भर में चार नवरात्र होते हैं। जिसमें दो प्रकट और दो गुप्त कहलाते हैं।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष नवरात्र गुरुवार के दिन प्रारंभ होने से माता का आगमन पालकी और शुक्रवार को समापन होने से विदाई भी पालकी पर होगी। उनके अनुसार मां दुर्गा का पालकी पर आना और जाना दोनों शुभ नहीं माना गया है।
आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि इस बार तिथियों के घटने-बढ़ने से नवरात्र पर अष्टमी एवं नवमी का संयोग एक ही दिन पड़ रहा है।
वहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से रौद्र नामक नए संवत्सर का प्रारंभ हो जाएगा। अपने नाम के अनुरूप यह संवत्सर यानी 2083 आम जनमानस के लिए अधिक अनुकूल नहीं रहेगा।
उन्होंने बताया कि नव संवत्सर प्रारंभ होने के साथ ही इस दिन से ही वर्ष के पदाधिकारी भी बदल जाते हैं। इस वर्ष का राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे।
इसके फलस्वरूप इस साल प्राकृतिक आपदा, उथल-पुथल और अग्निकांड की संभावना बनी रहेगी।
उत्तराखंड ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष पंडित रमेश सेमवाल के अनुसार 19 मार्च से मां दुर्गा के नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं।
इसी दिन रौद्र नामक नए संवत्सर का प्रारंभ होगा। इस वर्ष के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। उनके अनुसार इस वर्ष माता पालकी पर सवार होकर आ रही हैं जो अच्छा संकेत नहीं है।
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हुई थी सृष्टि की रचना प्रारंभ
आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को और भी कई नाम से जाना जाता है।
ब्रह्म पुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और इसी दिन से सतयुग का प्रारंभ हुआ था। इसलिए इस दिन को युगादि तिथि तथा स्वयं सिद्ध मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है।
सुबह 6:50 से 7:50 के मध्य शुभ मुहूर्त
- 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:50 से 7:50 के मध्य शुभ मुहूर्त रहेगा।
- इसके बाद सुबह 10:30 से अपराह्न 3:00 बजे के मध्य मुहूर्त अच्छा रहेगा।
- सुबह 10:30 से अपराह्न में 3:00 बजे के मध्य चर लाभ और अमृत की चौघड़िया विद्यमान रहेगी। इसी दौरान अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा।
सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार
नवरात्र के दौरान कलश स्थापना करके मां दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि की प्राप्ति होती है। साथ ही, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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नवरात्र के दौरान नियम-संयम करने से शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान सात्विक आहार और भूमि शयन करना चाहिए। दुर्गा सप्तशती का पाठ अखंड दीप जलाकर करना चाहिए।