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    हरिद्वार के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में 7वां दीक्षा समारोह, 1379 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की

    Updated: Mon, 19 Jan 2026 06:24 PM (IST)

    हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह संपन्न हुआ, जिसमें 1379 विद्यार्थियों को विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की गईं। मुख्य अतिथ ...और पढ़ें

    हरिद्वार स्थित जीवन विद्या आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह आयोजित।

    हरिद्वार स्थित जीवन विद्या आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह आयोजित। 

    HighLights

    1. 1379 विद्यार्थियों को डिप्लोमा, स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट उपाधियाँ मिलीं।

    2. स्वामी अवधेशानंद गिरि ने गायत्री परिवार के सामाजिक योगदान की सराहना की।

    3. डॉ. चिन्मय पंड्या ने शिक्षा को सेवा और राष्ट्रभाव से जोड़ने पर बल दिया।

    जागरण संवाददता, हरिद्वार। हरिद्वार स्थित जीवन विद्या आलोक केन्द्र देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का सातवां समावर्तन समारोह गंगा तट पर आध्यात्मिक संतों, देसंविवि के प्रतिकुलपति व विदेशी विशिष्ट मेहमानों के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान व देसंविवि के कुलगीत के साथ हुआ।

    समावर्तन समारोह के मुख्य अतिथि जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि गायत्री परिवार ने बीते दशकों में युग चेतना को जगाने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

    उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकार एवं कर्त्तव्यो के प्रति जाग्रत करने वाला एक व्यापक सांस्कृतिक अभियान है।

    _Seventh Convocation Ceremony of Dev Sanskriti University

    उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार ने नर-नारी समानता को व्यवहार में उतारते हुए महिलाओं को आत्मसम्मान, शिक्षा और नेतृत्व का अवसर प्रदान कर रहा है। साथ ही छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, समाज में एकता-समता की भावना के विस्तार तथा मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना में भी इसकी भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है।

    उन्होंने कहा कि आज जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब गायत्री परिवार द्वारा दिया गया यह विचार-दर्शन नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो रहा है।

    Dev Sanskriti University

    इस अवसर पर समारोह के अध्यक्ष देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि “आज की शिक्षा का लक्ष्य केवल बाहर की चुनौतियों से जूझना नहीं, बल्कि भीतर की सुप्त चेतना को जगाना है।

    बाहर की आग को बुझाना और अंदर की आग-सेवा, सद्भाव और राष्ट्रभाव को प्रज्वलित करना ही सच्ची दीक्षा है।” उन्होंने कहा कि यह उपाधि एक परिवर्तनकारी यात्रा का आरंभ है, ऐसी यात्रा जो चेतना के मार्ग को रूपांतरण के मार्ग में परिवर्तित करती है।

    यदि युवा अपनी शिक्षा को सेवा, संस्कार और साधना से जोड़ दें, तो वे न केवल अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं, बल्कि राष्ट्र और मानवता के उत्थान में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि जब चिंतन, चरित्र और व्यक्तित्व ऊपर की ओर उठना प्रारंभ करते हैं, तभी व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा देने में सक्षम होता है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मानवीय चेतना का विकास और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराना है।

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    यह दीक्षा समारोह विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत, नई जिम्मेदारी और नए संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया, जहां शिक्षा को जीवन निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखने का संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया।

    Dev Sanskriti University (Convocation

    इस दौरान हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड कृष रावल ने कहा कि देसंविवि शैक्षणिक संस्थान के साथ ही एक आध्यात्मिक सांस्कृतिक अभियान के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार कार्य किया है।

    हाउस आफ लार्ड लंदन के सदस्य लार्ड मेंल्डसन ने कहा कि लंदन के प्रधानमंत्री श्री कीर स्टारमर ने सम्पूर्ण गायत्री परिवार अपनी शुभेच्छा भेजी है।

    इस अवसर पर शांतिकंजु व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि, स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलपति डा. विजय धस्माना, डा. अजय तिवारी, डा. फिरोज मिस्त्री, डा. जहान मिस्त्री, डा. शोभित माथुर, डा. दिनेश शास्त्री, डा. सतीश कुमार शर्मा, पौलैंड स्थित भारत के राजदूत कार्तिकेय जौहरी सहित विश्व के 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिकुलपति ने अतिथियों को रुद्राक्ष की माला, युग साहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया।

    Haridwar Dev Sanskriti University

    विवि टॉपर

    वर्ष 2023 के श्रेया सिंह, वर्ष 2024 के शीतल कक्कड, 2025 के उपासना शर्मा, तो वहीं 2022-23 में 29 विद्यार्थियों नें गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 2023-24 में 31 छात्र-छात्राओं ने, 2024-25 में 29 युवाओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।

    वहीं किरन, सविता, रविन्द्र बालोदिया, आशीष कुमार, दिलीप सराह, प्रज्ञा श्रीवास्तव, विपिन पुनीयाल, लालिमा बाथम, शिल्पी वर्मा, विद्या सिंह, वंदना कुमारी, श्रद्धांजलि त्रिपाठी, दिवाकर शर्मा, टिकेश्वर बिसेन, महेन्द्र प्रताप सिंह राणा, रजत पाण्डेय सहित 40 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां दी है।

    उन्हें हिन्दी, योग विज्ञान एवं मानव चेतना, प्राच्य अध्ययन, इतिहास एवं भारतीय संस्कृति, मनोविज्ञान, भारतीय शास्त्रीय संगीत, शिक्षा शास्त्र, पत्रकारिता, कम्प्युटर विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर शोध पूरा होने पर डॉक्टरेट की उपाधियां दी गयीं।

    समारोह में कुल 1379 विद्यार्थियों को डिप्लोमा, स्नातक, परास्तानक व डॉक्टरेट की उपाधियां प्रदान की गयी। उन्हें भारत और भारतीय संस्कृति के उद्घोष के संकल्प के साथ विदाई को उपाधियां दी गयी।

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