रुड़की के बिनारसी गांव में शोभायात्रा में ताबड़तोड़ फायरिंग से दो की मौत, आगजनी और जमकर बवाल
बिनारसी गांव में संत रविदास जयंती शोभायात्रा के बाद दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ। अवैध हथियारों से हुई फायरिंग में आनंद नामक युवक की मौत हो गई और चार ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। बिनारसी गांव में संत रविदास जंयती की शोभयात्रा और भंडारे के बाद दो पक्षों में जमकर बवाल हो गया। इस दौरान एक पक्ष ने अवैध हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। जिसमें एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई और चार लोग घायल हो गए। जबकि गांव के पास खेत में एक व्यक्ति का शव पुलिस को मिला है।
आशंका जताई जा रही है कि दो पक्षों में हुए संघर्ष के बाद उसकी मौत हुई है। वहीं, आक्रोशित भीड़ ने साढ़े चार घंटे बाद शव मौके से उठने दिया। भीड़ ने एक घर में आग लगा दी और दस घरों में तोड़फोड़ भी की। भीड़ को काबू पाने के लिए पीएसी बुलानी पड़ी।
आरोपितों को हिरासत में लेने के दौरान आक्रोशित भीड़ ने हमले का भी प्रयास किया। पुलिस ने जैसे-तैसे आरोपितों को वहां से निकाला। एक घायल को रेफर किया गया है।
बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से ही रंजिश चली आ रही थी। हमला करने वाले प्रधान पक्ष के लोग बताए जा रहे हैं। वहीं, इससे पहले भी रविदास जयंती पर कई जगह पर संघर्ष और टकराव के मामले होते रहे हैं।
भगवानपुर थाना क्षेत्र के बिनारसी गांव में दो पक्षों के बीच वर्ष 2022 में हुए पंचायत चुनाव में प्रधान पद के चुनाव को लेकर रंजिश चली आ रही है। रविवार को गांव में संत रविदास जंयती की शोभायात्रा के बाद भंडारे का आयोजन हुआ।
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भंडारा समाप्ति के बाद गांव के ही आनंद (27) उसका भाई विशाल (25), योगेंद्र घाघा (23), गगनदीप और जोनी निवासी बिनारसी शौच के लिए जंगल की तरफ जाने लगे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोग वहां पर आए और इनके बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक हो गई।
देखते ही देखते दूसरे पक्ष की तरफ से करीब 30 से 35 लोग अवैध हथियार लेकर मौके पर पहुंचे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। पेट के पास गोली लगने से आनंद की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गोली लगने से उसका भाई विशाल, चेहरे के पास छर्रे लगने से योगेंद्र और पैर में गोली लगने से गगनदीप गंभीर रूप से घायल हो गए।
वहीं, हमलावरों ने जोनी के सिर पर तमंचे की बट से हमला कर उसे घायल कर दिया। घटना के बाद आरोपित वहां से हथियार लहराते हुए फरार हो गए। घटना से आक्रोशित भीड़ ने मुख्य आरोपित के मकान में आग लगा दी। जिसमें दो बाइक समेत घर का सारा सामान जल गया।
जबकि सात घरों में जमकर तोड़फोड़ की गई। परिवार के लोग वहां से जान बचाकर भागे। सूचना मिलने पर भगवानपुर थाना प्रभारी निरीक्षक सूर्यभूषण नेगी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
भीड़ के आगे पुलिस कम पड़ने पर पीएसी और आसपास के थानों से पुलिस बल मंगाया गया। पुलिस ने भीड़ से आरोपितों को बचाने के लिए एक कमरे में बंद कर दिया। एसपी देहात शेखर सुयाल भी मौके पर पहुंचे।
आक्रोशित भीड़ ने करीब साढ़े चार घंटे बाद शव उठने दिया। पुलिस जैसे ही दो लोगों को हिरासत में लेकर चलने लगी तो भीड़ ने हमले का प्रयास किया। पुलिस ने जैसे-तैसे आरोपितों को वहां से निकाला।
पुलिस ने पांच आरोपितों को हिरासत में लिया। वहीं, देर रात तक आक्रोशित भीड़ ने शव नहीं उठने दिया था। एसपी देहात शेखर सुयाल ने बताया कि एक युवक की मौत हुई है। फिलहाल पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने में लगी है। किसी को भी माहौल बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा।
वहीं, दो पक्षों में हुए संघर्ष के बाद देर शाम गांव के पास एक खेत के निकट मांगेराम (50) का शव बरामद हुआ है। संघर्ष के दौरान लाठी डंडों के हमले में मांगेराम की मौत की आशंका जताई जा रही है।
संघर्ष के बाद परिवार के लोगों ने मांगेराम के लापता होने की बात पुलिस से कही थी। जिसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की थी। मांगेराम दूसरे पक्ष का बताया गया है। एसपी देहात ने बताया की लाठी डंडे के हमले में मांगेराम की मौत होने की आशंका है।