यूनेस्को विश्व धरोहर फूलों की घाटी में आग के बाद हरिद्वार में अलर्ट, जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश
फूलों की घाटी में आग लगने के बाद हरिद्वार में वन विभाग और जिला प्रशासन अलर्ट पर है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने शुष्क मौसम के कारण जंगल की आग के बढ़ते ...और पढ़ें

जिलाधिकारी ने वन विभाग सहित अन्य विभागों को भी किया अलर्ट. File Photo
HighLights
फूलों की घाटी में आग के बाद हरिद्वार अलर्ट
जिलाधिकारी ने वन विभाग को सतर्क रहने को कहा
मंदिर क्षेत्रों में आग निगरानी, प्रशिक्षण के निर्देश
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। यूनेस्को विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ क्षेत्र में सामने आई आग की घटना के बाद हरिद्वार सहित मैदानी क्षेत्रों में भी वन विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। वर्षा न होने और लंबे समय से शुष्क मौसम बने रहने के कारण जंगलों में आग लगने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। हरिद्वार में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने वन विभाग सहित अन्य विभागों को जंगल में आग की घटना रोकने के लिए अलर्ट किया है।
बुधवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में जिला वनाग्नि सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में वनाग्नि से निपटने की तैयारियों, संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्निकरण और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने विशेष रूप से चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर क्षेत्र के वन क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए वहां आग की घटनाओं पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देशित किया कि मंदिर समितियों को फायर सेफ्टी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाए तथा उन्हें अग्निरोधक जैकेट, अग्निशमन उपकरणों और आवश्यक संसाधनों की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिए कि चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर को जोड़ने वाले मोटर मार्गों पर फायर ब्रिगेड वाहनों एवं एम्बुलेंस के साथ संयुक्त माकड्रिल की जाए। जिसमें आने वाली व्यवहारिक परेशानियों को दूर किया जाए। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत को निर्देशित किया गया कि आपदा मित्रों को विशेष प्रशिक्षण दें। साथ ही जंगलों में आग नियंत्रण से संबंधित जरूरी उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
हरिद्वार वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी स्वप्निल अनिरुद्ध ने बैठक में जानकारी दी कि जनपद के आग की दृष्टि से संवेदनशील सभी क्षेत्रों में नियमित रूप से फायर ड्रिल कराई जा रही है। इसके अंतर्गत सड़कों के किनारे गिरे सूखे पत्तों और ज्वलनशील पदार्थों को नियंत्रित कर फूंक-फांक के माध्यम से हटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों के भीतर भी विभागीय टीमें लगातार सक्रिय हैं।
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साथ ही जागरूकता अभियानों के माध्यम से ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि किसी भी संदिग्ध आग की घटना की सूचना समय रहते विभाग को मिल सके। इस वर्ष वन विभाग ने जंगल में आग की घटनाओं को शून्य तक सीमित करने का लक्ष्य बनाया है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरके सिंह, उप जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नेहा झा सहित राजाजी टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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