हरिद्वार में है भगवान शिव का महाभारतकालीन मंदिर, जहां दानवीर कर्ण करते थे जलाभिषेक
खानपुर स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर का संबंध महाभारत काल से है, जहां दानवीर कर्ण पूजा करते थे। ...और पढ़ें


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खानपुर में स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और सावन के महीने में दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
लवजीत शर्मा, खानपुर। कस्बा स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में दानवीर कर्ण पूजा करने आते थे। बताया जाता है कि यहां स्थित शिवलिंग के बारे में सिर्फ कर्ण को ही पता था। वह स्नान करने के बाद गुपचुप तरीके से महादेव की पूजा करते थे।
तभी से मान्यता चली आ रही है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी मनोकामना पूर्ण करते हैं।
सावन का महीना माना जाता है पवित्र
सनातन धर्म और शिव पुराण में जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। जल की धारा शिव को शीतलता प्रदान करती है। भक्त को मानसिक व भावनात्मक संतुलन देती है। नियमित रूप से जलाभिषेक करने से मन के विकार, क्रोध और पिछले कर्मों का प्रभाव भी कम होता है।
सावन का महीना सनातन धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने लोग भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं। प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में दूरदराज से श्रद्धालु महादेव के दर्शन करने खानपुर स्थित जटाशंकर महादेव मंदिर में आते हैं। महादेव का यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र में भक्तों की आस्था का केंद्र है।
यहां श्रद्धालु मंदिर भवन को छूकर मन्नत मांगते हैं। सावन माह में इस मंदिर में बड़ी संख्या में शिव भक्त कांवड़ लेकर भी पहुंचते हैं। आसपास के ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर में एक प्राचीन काल से कुआं बना हुआ है। मान्यता है कि कुएं का जल पीने से कई बीमारियां दूर हो जाती हैं।