साहब शादी है... 2 सिलिंडर से कैसे बनेगा 500 मेहमानों का खाना, रुड़की में अफसरों से फरियाद लगा रहे लोग
रुड़की में शादी समारोहों के लिए गैस सिलेंडरों की कमी से लोग परेशान हैं। प्रशासन द्वारा केवल दो व्यावसायिक सिलेंडर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जबकि 50 ...और पढ़ें

व्यवसायिक गैस सिलिंडर। जागरण

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, रुड़की। साहब शादी में पांच सौ लोग आएंगे, कैसे दो सिलिंडर पर पांच सौ लोगों का खाना तैयार होगा।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं खाद्य आपूर्ति विभाग के दफ्तर में कुछ इस तरह की फरियाद लेकर लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, एजेंसी संचालक गैस देने में आनाकानी कर रहे हैं।
इसको लेकर परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से शादी के दो दिन पहले ही दो व्यवसायिक सिलिंडर देने की व्यवस्था की गई है।
अगले सप्ताह से शादियों का सीजन शुरू होने जा रहा है। उससे पहले सगाई, रिंग सेरेमनी, हल्दी आदि की रस्म शुरू हो गई है।
शादी विवाह वाले परिवारों में मेहमानों का आवागमन बढ़ गया है। इसी बीच रसोई गैस की किल्लत ने परिवारों की परेशानी को बढ़ाया हुआ है। लोग परेशान है।
गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। घेरलू गैस सिलिंडर भी बुकिंग के चार से पांच दिन में घर पहुंच रहा है।
प्रशासन की ओर से राहत देते हुए शादी समारोह वाले परिवारों को दो व्यवसायिक सिलिंडर देने के लिए कहा गया है। इसकी एसओपी भी जारी कर दी गई है।
जिलाधिकारी की ओर से संबंधित तहसीलों के उप जिलाधिकारियों को इसके लिए अधिकृत कर दिया गया है। ऐसे में लोग एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
लोग ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को बता रहे हैं कि पांच सौ लोगों का खाना दो व्यावसायिक सिलिंडर पर बनना संभव ही नहीं है। इसलिए कम से कम 10 व्यावसायिक सिलिंडर की व्यवस्था की जाए।
वहीं, लोग इस बात की भी शिकायत कर रहे हैं कि एजेंसी संचालक उनको गोदाम में सिलिंडर नहीं होने के बाद कहकर टरका रहे हैं।
इसके अलावा शादी समारोह से दो दिन पहले सिलिंडर उपलब्ध कराने का नियम लगा दिया गया है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट ने बताया कि इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। शासन से जो एसओपी जारी की गई है उसके अनुसार सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
भट्ठी पर काम करने के वाले कारीगरों का अभाव
अधिकांश कैटर्स इस बात को लेकर परेशान हैं कि कोयले एवं लकड़ी की भट्ठी पर काम करने वाले अधिकांश कारीगर अब नहीं है। करीब दस साल से काफी बदलाव आ चुका है।
कोयला एवं लकड़ी की तुलना में गैस पर खाना तैयार करना सस्ता एवं सुविधाजनक साबित हो रहा था। इसलिए अब भट्ठी पर काम करने वाले कारीगरों की संख्या कम होती जा रही है।
तंदूर के लिए ही कारीगर की किल्लत बनी हुई है। कैटर्स संजय कुमार, प्रवीण कुमार ने बताया कि इस समय शादी विवाह में खाना तैयार करना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
लोग मैन्यू में कटौती कर रहे हैं। खासतौर से अब घर पर मावा एवं पनीर तैयार कराने के बजाए बाजार से ही खरीद रहे हैं।
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