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एक पलड़े में गंगाजल, दूसरे में 115 साल की दादी; हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान दिखा अद्भुत नजारा

Published: Mon, 03 Aug 2026 06:23 AM (IST)

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रवण कुमार जैसी भक्ति के कई अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहे हैं। शिवभक्त ...और पढ़ें

अपनी दादी को कांवड़ यात्रा कराते हुए संभल (उत्तर प्रदेश) के गांव खेतापुर निवासी प्रमोद और सतपाल, साथ में परिवार के अन्य सदस्य

अपनी दादी को कांवड़ यात्रा कराते हुए संभल (उत्तर प्रदेश) के गांव खेतापुर निवासी प्रमोद और सतपाल, साथ में परिवार के अन्य सदस्य

HighLights

  1. 115 वर्षीय दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा।

  2. बेटे मां को कांवड़ में लेकर हरिद्वार से मेरठ।

  3. श्रवण कुमार जैसी भक्ति के अद्भुत दृश्य।

जागरण संवाददाता, हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दौरान धर्मनगरी हरिद्वार में इस बार श्रवण कुमार भक्ति के कई रंग दिख रहे हैं। शिव भक्त अपने माता पिता को कांवड़ मेले में ला रहे हैं और कांवड़ में बिठाकर ले जा रहे हैं। हर दिन अस्था और पारिवारिक संस्कारों के ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं।

जो अपनी ओर हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। रविवार को संभल (उत्तर प्रदेश) के गांव खेतापुर निवासी प्रमोद और सतपाल अपनी लगभग 115 वर्षीय दादी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर और दूसरे पलड़े में मां गंगा का पवित्र जल रखकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस खास कांवड़ को देखने के लिए मार्ग में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

प्रमोद और सतपाल ने बताया कि उनकी दादी अब चलने-फिरने में असमर्थ हैं। उनकी लंबे समय से इच्छा थी कि वह भी कांवड़ यात्रा का पुण्य लाभ प्राप्त करें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए दोनों नातियों ने उन्हें कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार इस धार्मिक यात्रा में उनके साथ चल रहा है।

यात्रा के दौरान दादी हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण करती रहीं और राहगीरों का अभिवादन भी करती नजर आईं। राहगीर इस अनोखी कांवड़ के साथ तस्वीरें और वीडियो भी बनाते रहे।

मेरठ की तहसील सरधना निवासी राजकुमारी को उनके बेटे अनुज और सुशील कुमार कांवड़ यात्रा करा रहे हैं। गंगा जल के साथ अनुज और सुशील भी मां को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से मेरठ लेकर जा रहे हैं।

अनुज ने कहा कि करीब दो वर्ष पहले उनकी मां की तबीयत जब बहुत खराब हुई तो उन्होंने भोले नाथ प्रार्थना की। जिसके बाद उनकी मां का स्वस्थ्य सही हो गया। यही मनोकामना पूर्ण हुई तो इस बार मां को कांवड़ यात्रा कराने का निश्चय किया।

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