Surendra Koli Suicide: यूपी से आई सिफारिश की कॉल... तब हरिद्वार में खोल सका चाय की दुकान... उसी में दी जान
Surendra Koli Suicide: निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश में चाय की दुकान खोली थी।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
गौरव त्यागी, हरिद्वार। Surendra Koli Suicide: निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में नई जगह पर नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश थी, जो उसे खुदकुशी की ओर ले गई। सप्तऋषि मार्ग पर कुछ दिन पहले ही चाय की दुकान खोलने वाले सुरेंद्र कोली के आखिरी दिनों की कहानी आसपास के लोगों की यादों में बिखरी हुई है।
दुकान खोलते समय उसने पूजा कराई, मिठाई बांटी और फिर अचानक कई दिनों के लिए गायब हो गया। लौटकर आया तो फिर वही दुकान उसकी आखिरी मंजिल बन गई।
छह सितंबर को खोली थी दुकान
स्थानीय लोगों के अनुसार छह सितंबर को उसने सप्तऋषि मार्ग पर चाय की दुकान शुरू की थी। दुकान खोलने से पहले विधि-विधान से पूजा कराई गई। आसपास मिठाई और प्रसाद भी बांटा गया। पास की नाई की दुकान पर काम करने वाले रामलाल ने बताया कि सुरेंद्र कोली व्यवहार में बेहद सामान्य और मिलनसार था।
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दुकान खुलने के बाद एक-दो दिन उसने चाय बेची, फिर अचानक कहीं चला गया। करीब तीन-चार दिन पहले लौटा और दुकान संचालित करने लगा। रामलाल के मुताबिक वह लाल माता मंदिर के पास लगी टोंटी से पानी भरता था। आसपास के कुछ लोग उसकी दुकान पर चाय पीने भी पहुंचते थे।
किसी को उसके व्यवहार से ऐसा आभास नहीं हुआ कि सुरेंद्र कोली किसी बड़ी परेशानी से गुजर रहा है और निठारी कांड का आरोपित रहा है। रोशनाबाद निवासी धर्मेंद्र कौशिक के मुताबिक सुरेंद्र को परिवार के एक बच्चे के जन्मदिन पर कुछ धनराशि की जरूरत थी। बच्चे के जन्मदिन पर कुछ न भेज पाने की बेबसी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। इस पर धर्मेंद्र ने उसे दो हजार रुपये दिए थे और कुछ दिन में लौटाने के लिए कहा था।
किसी को मानता था बेटा
सुरेंद्र का गुरुवार को परिवार या किसी परिचित सदस्य से फोन पर विवाद हो रहा था, सुरेंद्र कोली कहता था कि उसके अपने बच्चे नहीं हैं और लेकिन किसी को वह अपना बेटा मानता था। उसकी फोटो का प्रिंट भी उसके पास था। जो उसकी डायरी के अंदर मिला।
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रोशनाबाद में दुकानदार विशाल कश्यप उर्फ जय के मुताबिक करीब डेढ़ माह पहले उन्हें शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश निवासी एक परिचित की बहन डा. वैष्णवी का फोन आया था। उन्होंने एक परेशान व्यक्ति को सिडकुल में नौकरी और रहने के लिए कमरा दिलाने में मदद का आग्रह किया था। विशाल ने सुरेंद्र कोली को रोजगार दिलाने और कमरा दिलाने में भी मदद करने की बात कही।
