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    भोले की महिला भक्त: किसी की पूरी हुई मनोकामना, तो कोई शिव को प्रसन्न करने कांवड़ लेकर निकली

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 10:32 AM (IST)

    हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रही लाखों महिला कांवड़ यात्री अपनी मनोकामना पूरी होने या परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यात्रा कर रही हैं। ...और पढ़ें

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    गौरव त्यागी, हरिद्वार । सावन के महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों शिवभक्तों के बीच इस बार भी बड़ी संख्या में महिला कांवड़ यात्री शामिल हैं। कंधे पर कांवड़ और श्रद्धा का संकल्प लिए ये महिलाएं लंबी दूरी पैदल तय कर रही हैं।

    किसी की मनोकामना पूरी होने के बाद यह यात्रा आभार प्रकट करने का माध्यम बनी है तो कोई भगवान शिव की कृपा पाने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर निकली है। कठिन रास्ते, बारिश, थकान और भीड़ के बावजूद उनके कदम लगातार मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।

     हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर जलाभिषेक

    महिला कांवड़ यात्रियों ने बताया कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, श्रद्धा और संकल्प की परीक्षा भी है। उनका कहना है कि भगवान शिव पर अटूट विश्वास ही उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है।

    हरियाणा के फरीदाबाद निवासी सोमवती ने बताया कि पिछले वर्ष उनके पति गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि यदि सब कुछ ठीक हो गया तो वह हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर जलाभिषेक करेंगी। अब पति पूरी तरह स्वस्थ है और उसी मनोकामना के पूर्ण होने पर वह कांवड़ लेने आई हैं। उन्होंने कहा कि रास्ते की थकान उन्हें बिल्कुल महसूस नहीं होती, क्योंकि हर कदम पर भगवान शिव का आशीर्वाद साथ रहता है।

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    उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी प्रमिला ने बताया कि वह अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा, परिवार की खुशहाली और घर में सुख-शांति की कामना लेकर कांवड़ यात्रा कर रही हैं। भगवान शिव की आराधना से मन को अद्भुत शांति मिलती है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान दूसरे श्रद्धालुओं का सहयोग और सेवा भाव भी प्रेरणा देता है। जगह-जगह लगाए गए शिविरों में मिलने वाली सुविधाओं से काफी राहत मिलती है।

    हरियाणा के सोनीपत निवासी राजकली कहा कि वह कई वर्षों से कांवड़ यात्रा करना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अवसर नहीं मिल पाया। इस बार उन्होंने संकल्प लिया और यात्रा पर निकली हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को भी अपनी आस्था के अनुसार धार्मिक यात्राओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक ऊर्जा भी मिलती है।

    हरियाणा के गुरुग्राम निवासी सुशीला ने बताया कि वह भगवान शिव को प्रसन्न करने और समाज में सुख-शांति की कामना के साथ गंगाजल लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान हजारों अनजान लोग एक-दूसरे की मदद करते दिखाई देते हैं। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है। जाति, भाषा और क्षेत्र की सीमाएं यहां समाप्त हो जाती हैं और सभी शिवभक्त एक परिवार की तरह नजर आते हैं।

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