Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    एरीज का एलएडब्ल्यूपी रडार बताएगा हवा की सटीक गति और दिशा, मौसम पूर्वानुमान में मिलेगी मदद

    Updated: Tue, 24 Mar 2026 04:55 PM (IST)

    एरीज नैनीताल मौसम की बढ़ती दुश्वारियों के मद्देनजर लोअर एटमास्फेयर विंड प्रोफाइलर (एलएडब्ल्यूपी) रडार स्थापित कर रहा है। ...और पढ़ें

    एरीज के एसटी रडार का फोटो। जागरण।

    एरीज के एसटी रडार का फोटो। जागरण। 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    रमेश चंद्रा, नैनीताल। मौसम की बढ़ती दुश्वारियों व अनियमितताओं के मद्देनजर जानकारी जुटाने के लिए तकनीकी विधाएं जुटाना अब जरूरी हो गया है।

    इसी को ध्यान में रखते हुए आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल स्ट्रेटोस्फेयर ट्रोपोस्फेयर (एसटी) रडार के बाद अब लोअर एटमास्फेयर विंड प्रोफाइलर(एलएडब्लयूपी) स्थापित करने जा रहा है।

    यह रडार सतह से पांच किमी की ऊंचाई तक हवा की गति व दिशा, आर्द्रता, तपामान आदि मौसम संबंधी आंकड़ों की सटीक जानकारी देगा।

    एरीज के निदेशक डा. मनीष नाजा ने बताया कि एलएडब्ल्यूपी रडार मौसम के आंकड़े जुटाने के लिए बेहद जरूरी है।

    यह डोप्लर रडार के समान ही होता है लेकिन इसके अत्याधुनिक उपकरण विशेष जानकारियां देने में सक्षम है।

    यह वायुमंडल में पांच किमी की ऊंचाई तक हवा की गति और उसकी दिशा बताएगा। यह बादल और वर्षा के दौरान भी कार्य कर सकता है।

    वायुमंडल में मौजूद ऐसे छोटे-छोटे कण (एयरोसोल) जिनमें उथल-पुथल के कारण तापमान और आर्द्रता में बदलाव आता है, उनका भी सही डेटा उपलब्ध करेगा।

    इस सबसे मौसम का पूर्वानुमान बताने में आसानी होगी। साथ ही विमानों की सुरक्षित उड़ान में भी ये पूर्वानुमान मददगार होंगे।

    वायुमंडल में अलग-अलग ऊंचाई पर रहने वाले अलग-अलग तापमान को भी यह सहजता से रिकार्ड कर सकेगा।

    साथ ही हवा में मौजूद छोटी-छोटी टर्बुलेंस से रेडियो तरंगों को रिफ्लेक्ट करके सटीक मापन कर सकता है। इससे ऊंचाई पर बहने वाली हवा का पूरा प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है।

    चूंकि एरीज वायुमंडलीय विज्ञान का अध्ययन का केंद्र है इसलिए इस सुविधा के उपलब्ध होने से शोध व अध्ययन आसान हो सकेंगे। साथ ही मौसम संबंधी जानकारी भी जुटाई जा सकेगी।

    एसटी रडार के बाद यह दूसरा रडार

    एरीज निदेशक डा. मनीष नाजा ने बताया कि एरीज में एसटी रडार वर्ष 2019 में स्थापित किया गया था।

    अब एलएडब्ल्यूपी रडार को एरीज परिसर में स्थापित किया जा रहा है। जिसमें लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा। इसे स्थापित किए जाने के लिए तैयारियां चल रही हैं। इसे लगाने में करीब 4.50 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

    एसटी रडार 15 करोड़ की लागत से बना था। एसटी रडार असमान में 20 किमी ऊंचाई तक अध्ययन कर सकता है। इसके साथ ही एसटी रडार के अपग्रेडेशन को लेकर भी प्रस्ताव बनाया जा रहा है।

    यह भी पढ़ें- जिस दुर्लभ धूमकेतु 3आइ पर लगी है दुनिया की नजर, आधीरात को एरीज के दूरबीन से कैमरे में हुआ कैद

    यह भी पढ़ें- दुनिया की Natural Lab में होगी जोड़ीदार ब्लैक होल की खोज, एरीज का रोल रहेगा खास