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भाजपा ने रणनीतिक तरीके से किया कांग्रेस के 'शुद्धीकरण' नैरेटिव पर वार, पहली बार उत्तराखंड में गरजे नितिन नवीन

Published: Thu, 10 Sep 2026 08:47 AM (IST)

कांग्रेस द्वारा मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रैली के बाद 'शुद्धीकरण' के मुद्दे को दलित अपमान से जोड़ने पर भाजपा ने पलटवार किया है।

खरगे से लेकर कांग्रेस की ओर से मुद्दा बनाने के बाद पहली बार गरजे नितिन नवीन.

खरगे से लेकर कांग्रेस की ओर से मुद्दा बनाने के बाद पहली बार गरजे नितिन नवीन.

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संक्षेप में पढ़ें

गणेश जोशी, हल्द्वानी। शुद्धीकरण के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बेचैनी थम नहीं रही है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रामलीला मैदान में सभा के बाद सभास्थल का शुद्धीकरण के मुद्दे को तूल दे दिया है। इसे दलित अपमान से जोड़ते हुए राष्ट्रीय राजनीतिक के विमर्श में ला खड़ा कर दिया है।

भाजपा ने भी खरगे की सभा के ठीक एक महीने बाद हल्द्वानी में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में प्रदेश की कार्यसमिति की बैठक की। इसमें कांग्रेस की ओर से उठाए गए शुद्धीकरण मुद्दे पर निंदा प्रस्ताव पारित किया है।

यह कहा है कि कांग्रेस ने शुद्धीकरण की हकीकत जाने बिना ही राजनीतिक दुष्प्रचार किया। भाजपा ने इसे समाज को बांटने वाला करार दिया। अब पार्टी इसे रणनीतिक तरीके से सामाजिक सौहार्द व समरसता के जरिये कांग्रेस के नैरेटिव का जवाब देगी।

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भाजपा ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में इसे सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला विषय बताया और कहा गया कि स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम स्थल की धार्मिक एवं पारंपरिक प्रक्रिया को जाति-विरोधी घटना के रूप में प्रचारित करना समाज को बांटने का प्रयास बनाया गया। अगर किसी धार्मिक स्थल अथवा मंच पर पूर्व निर्धारित परंपरा के अनुसार शुद्धीकरण की कोई प्रक्रिया होती है तो उसका परीक्षण तथ्यों के आधार पर होना चाहिए था।

जातिगत तनाव बढ़ाने का काम

कांग्रेस ने अपने एजेंडे के तहत जातिगत तनाव बढ़ाने का काम किया। यह भी कहा कि धार्मिक एवं पारंपरिक प्रक्रियाओं को राजनीतिक रंग देने के बजाय तथ्यों के आधार पर पूरे प्रकरण को देखा जाना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने यह कहा कि वह इस मुद्दे पर पहली बार हल्द्वानी में आकर ही बोल रहे हैं। सीएम ने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस के पास अपमान का काेई प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद कांग्रेस भ्रम फैला रही है।

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भाजपा पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को सामाजिक समरसता के जरिये आगे बढ़ना चाहती है। अब जिस तरीके से राजनीतिक हालात बन रहे हैं। उत्तराखंड समेत उत्तर प्रदेश व पंजाब में भी 2027 में चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है लेकिन भाजपा भी हर तरीके से नैरेटिव का जवाब मजबूती से दे रही है।