कान्हा घटना के बाद कार्बेट में बढ़ा अलर्ट, बाघों-गुलदारों पर कैनाइन डिस्टेंपर का खतरा
कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे के बाद, कार्बेट टाइगर रिजर्व में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, रामनगर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के साथ ही वन विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है।
इसे देखते हुए कार्बेट टाइगर रिजर्व ने भी अपने यहां सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्य रूप से आवारा कुत्तों में फैलने वाली संकामक बीमारी है, जो अब बाघों और गुलदारों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
हाल ही में कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके शावकों सहित छह बाघों की मौत हो गई थी। जिसकी वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को माना गया है।
आबादी के नजदीक डेरा जमाने लगे बाघ व गुलदार
कार्बेट पार्क हो या आसपास के वन प्रभाग, सभी का जंगल खुला हुआ है। इनसे लगी आबादी क्षेत्र में कुत्ते भी रहते हैं। वहीं बाघ व गुलदार भी आसान शिकार के लिए रामनगर में आबादी के नजदीक डेरा जमाने लगे हैं। बाघ से ज्यादा गुलदार केवल कुत्तों का ही अपना शिकार बना रहा है। इस कारण बाघ व खासकर गुलदारों में भी कैनाइन डिस्टेंपर का खतरा बना हुआ है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया कि रेंजर व फील्ड स्टाफ को कहा गया है कि यदि किसी बाघ में कोई संदिग्ध लक्षण दिखते हैं तो तुरंत कार्बेट के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करेंगे। इसके अलावा नैनीताल व पौड़ी जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र लिख दिया है कि जो आसपास स्ट्रीट डाग है, उनका भी वैक्सीनेशन कराया जाए।