नैनीताल: हाई कोर्ट के आदेश पर उत्तराखंड में आठ और आजीवन कैदी रिहा
कोर्ट के दखल के बाद 45 चिन्हित कैदियों में से आठ और कैदियों को रिहा किया गया है, जबकि 167 कैदी अभी भी कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण जेल में हैं ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने प्रदेश की जेलों में आजीवन की सजा काट चुके कैदियों को रिहा नहीं करने के मामले में स्वतः संज्ञान लेती जनहित याचिका सहित कैदियों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर यह बताने को कहा है कि याचिकाकर्ता कैदियों को क्यों व किस वजह से नहीं छोड़ा जा रहा है।
अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कहा गया कि चिन्हित सूची में शामिल 45 में से आठ और कैदियों को रिहा किया गया है।
सरकार ने हाई कोर्ट में दी जानकारी
ऐसे भी अपराधी हैं, जिनको छोड़ने के लिए राज्य सरकार की और अनुमति लेनी आवश्यक है जबकि कैदियों की तरफ से कहा गया कि उनकी सजा कब के पूरी हो चुकी है, सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश होने के बाद भी रिहा नहीं किया जा रहा है। यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। रिहा करने को लेकर जेल प्रशासन को पत्र भी दिए गए लेकिन उसपर भी कोई ध्यान नही दिया गया।
यह भी पढ़ें- आपके दिमाग में क्या चल रहा है, बताएगी डीप लर्निंग मशीन; AMU के इंजीनियरिंग छात्रों ने बनाई डिवाइस
हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाई कोर्ट को निर्देश देकर कहा था कि इस आदेश का अनुपालन करवाया जाए। आदेश का अनुपालन नहीं करने पर इस मामले का हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। हाई कोर्ट के न्यायाधीश सहित न्यायिक अधिकारियों ने जेलों का निरीक्षण किया, जहां 167 ऐसे कैदी जेलों में मिले, जिनकी सजा पूरी हो चुकी थी, कानूनी प्रक्रिया पूरी नही होने के कारण उनको रिहा नहीं किया गया।