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    गौलापार टैंक हादसा: जिसने सुना वो दौड़ा चला आया, आंगन में तीन शव देख फट गया कलेजा

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 12:42 PM (IST)

    गौलापार के मानपुर गांव में एक निर्माणाधीन टैंक में जहरीली गैस की चपेट में आने से मां सरस्वती देवी और उनके दो बेटों धर्मेंद्र व कुशाल की मौत हो गई। ...और पढ़ें

    मां सरस्वती देवी और दो बेटे धर्म सिंह बिष्ट व खुशाल सिंह बिष्ट शवों को अंतिम संस्कार के लिए सूर्या देवी के समीप स्थित घाट ले जाते स्वजन। जागरण

    मां सरस्वती देवी और दो बेटे धर्म सिंह बिष्ट व खुशाल सिंह बिष्ट शवों को अंतिम संस्कार के लिए सूर्या देवी के समीप स्थित घाट ले जाते स्वजन। जागरण

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    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। उस घर में मातम पसरा हुआ तो जहां एक दिन पहले तक खुशियां गूंजती थी। खेड़ा से दानीबंगर तक जिसे भी पता चला वो परिवार को ढांढस बंधाने और सांत्वना देने के लिए दौड़ा चला आया, लेकिन बिष्ट परिवार के आंगन में एक साथ तीन शवों को देख कोई कुछ कह न सका।

    बस हर किसी की आंखें नम थी। पति की मौत के बाद परिवार को संभालने वाली सरस्वती देवी के साथ ही दोनों बेटे धर्मेंद्र औैर कुशाल दुनिया को अलविदा कह चुके थे। सरस्वती की दो बहू और उनके छोटे बच्चों पर नजर पड़ने पर हर कोई मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि इन्हें इस दुख को सहने की हिम्मत देना।

    जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत

    गौलापार की सुंदरपुर रैक्वाल ग्राम पंचायत से जुड़े मानपुर गांव निवासी सरस्वती देवी और उसके दो बेटों की मंगलवार देर शाम निर्माणाधीन टैंक के अंदर पैदा हुई जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई थी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शवों को घर लाया गया। इसके बाद सूर्या देवी मंदिर से पहले स्थित पारंपरिक घाट पर अंत्येष्टि के लिए ले जाया गया। मोर्चरी, घर से लेकर घाट तक बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

    बिरादरी से जुड़े लोगों ने तीनों की चिता को मुखाग्नि दी। मुखाग्नि देने वालों में धर्मेंद्र का नौ साल का बेटा चिराग भी शामिल था। मासूम को देख मौजूद लोग भी भावुक हो गए। दूसरी तरफ घर पर धर्मेंद्र की पत्नी ज्योति और खुशाल की पत्नी हिमानी की चीत्कार से पूरा आंगन गूंज रहा था। किसी तरह रिश्तेदारी और गांव से जुड़ी महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिशें कर रही थीं।

    दादी, इन सभी को बचाकर लाना
    मंगलवार शाम हुई घटना के बाद प्रधान पति व समाजसेवी नीरज रैक्वाल अचेत पड़े मां-बेटों को अस्पताल ले जाने के लिए घर पहुंचे थे। इस दौरान कुशाल की गर्भवती पत्नी हिमानी ने नीरज से कहा कि दादी (बड़े भाई) इन्हें (तीनों) बचाकर घर लाना, जिसके बाद ग्रामीणों की मदद से तीनों को एसटीएच लाया गया, लेकिन यहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

    धर्मेंद्र-खुशाल को बुधवार को गांव जाना था
    बिष्ट परिवार मूल रूप से ओखलकांडा ब्लाक के कौंता गांव का रहने वाला है। मानपुर गांव के अलावा हल्द्वानी के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में इस गांव के लोग रहते हैं। कौंता में 24 जुलाई से बड़े धार्मिक आयोजन का शुभारंभ था। धर्मेंद्र और खुशाल बुधवार सुबह गांव निकलने वाले थे। टैंक की शटरिंग हटाने को लेकर आगे जल्द समय मिले न मिले। इस चक्कर में मंगलवार देर शाम शटरिंग हटाने का फैसला लिया गया।

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