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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    बनभूलपुरा में पुलिस पर पत्थर बरसाने वाले सात उपद्रवी फरार

    By Skand ShuklaEdited By:
    Updated: Mon, 21 Jan 2019 06:24 PM (IST)

    पुलिस पर पत्थर बरसाने वाले कुछ उपद्रवी इलाके से गायब हो गए हैं। दरअसल, पुलिस की चिह्नीकरण कार्रवाई में इनका नाम सबसे उपर हो था। ...और पढ़ें

    बनभूलपुरा में पुलिस पर पत्थर बरसाने वाले सात उपद्रवी फरार
    बनभूलपुरा में पुलिस पर पत्थर बरसाने वाले सात उपद्रवी फरार

    हल्द्वानी, जेएनएन : पुलिस पर पत्थर बरसाने वाले कुछ उपद्रवी इलाके से गायब हो गए हैं। दरअसल, पुलिस की चिह्नीकरण कार्रवाई में इनका नाम सबसे उपर हो था। अब कानूनी शिकंजे में फंसने का डर सताते ही आरोपितों ने घर पर रहना छोड़ दिया। वहीं सूत्रों की माने तो पुलिस पहचान में आ चुके चेहरों को पकडऩे के लिए अधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रही है। बनभूलपुरा शहर का सबसे संवेदनशील एरिया है। लिहाजा पुलिस कोई भी ऐसा कदम उठाने से बच रही है। जिससे फिर हंगामा खड़ा हो जाए।

    बुधवार दोपहर बनभूलपुरा थाने के पास तेज रफ्तार बस ने चार साल के मासूम अदनान को अपनी चपेट में लिया था। उपचार के दौरान उसकी मौत की सूचना मिलने पर लोग भड़क गए। उन्होंने दो बार में पुलिस टीम पर पत्थर बरसाए। पथराव में कोतवाल विक्रम राठौर, एसआइ मंगल सिंह नेगी समेत एक दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालांकि पुलिस के अक्रामक रूख अपनाते ही पत्थरबाज भाग खड़े हुए हैं। गुरुवार को पुलिस की तरफ से 50-60 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया गया था। जिसके बाद से चेहरे पहचानने की कार्रवाई चल रही थी। वहीं सूत्रों की माने तो घटना के बाद हंगामा करने में सबसे आगे चल रहे पांच-सात लोग बनभूलपुरा क्षेत्र में दिखना बंद हो गए हैं।

    नहीं पकड़ा तो फिर बढ़ेगा दुस्साहस

    पुलिस टीम पर पत्थर बरसाने वाले कई चेहरे ऐसे थे। जिन्हें पुलिस किसी न किसी मामले में पहले पकड़ चुकी थी। भीड़ के बीच में होने का फायदा उठाकर इन्होंने ज्यादा ड्रामा किया। वहीं अगर किसी दबाव में पुलिस इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने से पीछे हटी तो इनका दुस्साहस हर हाल में बढ़ेगा।

    अब सेटिंग में जुटे

    खुद को घिरता देख कई उपद्रवी अब बचने का तरीका तलाशने में जुटे हैं। सिफारिश पुलिस से नहीं बल्कि नेताओं के जरिए करवाने का प्रयास करवाया जा रहा है। सूत्रों की माने तो कई छोटे नेता इन्हें बचाने का उपाय ढूंढ रहे हैं।

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