Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    International Tiger Day: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व बना बाघ संरक्षण का प्रतीक, राजाजी में भी बढ़ रही बाघों की शान

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 03:57 PM (IST)

    उत्तराखंड का कॉर्बेट टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण में देश का सिरमौर बन गया है, जहां बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कॉर्बेट से बाघों को राजाजी टाइगर रि ...और पढ़ें

    कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला जोन में घूमते बाघ। सौ. सीटीआर निदेशक

    कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला जोन में घूमते बाघ। सौ. सीटीआर निदेशक

    HighLights

    1. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 260 बाघों के साथ शीर्ष पर

    2. कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का सफल स्थानांतरण

    3. बढ़ती बाघ संख्या से मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती

    त्रिलोक रावत, रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड में स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) देश में बाघों के संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रकृति, सुरक्षा और संरक्षण से यहां बाघों की संख्या में हर साल वृद्धि हो रही है।

    कार्बेट टाइगर रिजर्व बाघों का ऐसा सिरमौर बन गया है, जहां बाघों ने न केवल अपने क्षेत्र में बल्कि राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों में भी विस्तार किया है। अभी कार्बेट के पांच और बाघ राजाजी के जंगल की शान बढ़ाने जाएंगे।

    कार्बेट टाइगर रिजर्व सही मायनों में वर्ष 2010 में रूस से शुरू हुए इंटरनेशनल टाइगर डे के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है। यहां बाघों के संरक्षण का उद्देश्य साकार भी हो रहा है।

    भारत के 58 टाइगर रिजर्व में सीटीआर बाघों की संख्या के मामले में शीर्ष पर है। वर्ष 2006 में यहां 150 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी जो लगातार बढ़ती रही।

    2010 में यह संख्या 184, 2014 में 215, 2018 में 231 और 2022 में 260 बाघों तक पहुंच गई। कार्बेट में बाघों का घनत्व भी सभी राज्यों से अच्छा है, यहां प्रति सौ वर्ग किलोमीटर में 14 बाघ पाए जाते हैं।

    राजाजी को संवार रहा कार्बेट का राजा

    हरिद्वार का राजाजी टाइगर रिजर्व (आरटीआर) का पश्चिमी मोतीचूर क्षेत्र बाघों के लिहाज से सूना था। बाघों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए काम कर रही भारत सरकार की एजेंसी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण(एनटीसीए) ने 51 बाघों वाले आरटीआर में उनकी संख्या बढ़ाने के लिए कार्बेट को चुना।

    वर्ष 2020 से 2025 के बीच पांच बाघ-बाघिनों को कार्बेट से ट्रांसलोकेट किया गया है। अब ये बाघ वहां के परिवेश में स्वयं को ढाल चुके हैं और आबादी बढ़ाने की ओर अग्रसर हैं। साथ ही अभी पांच और बाघ कार्बेट से आरटीआर ले जाए जाने हैं।

    खबरें और भी

    यहां हैं सर्वाधिक बाघ 

    टाइगर रिजर्व में

    • कार्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड : 260,
    • बांदीपुर टाइगर रिजर्व, कर्नाटक : 150
    • नागरहोले टाइगर रिजर्व, कर्नाटक : 141

    राज्य में 

    • मध्य प्रदेश : 785
    • कर्नाटक : 563
    • उत्तराखंड : 560

    कार्बेट में बाघों के अनुकूल प्राकृतिक माहौल और सुरक्षा के लिए कुशल प्रबंधन है। भारत सरकार ने कार्बेट के अलावा अब बाहरी वन क्षेत्रों को भी बाघ सुरक्षा के लिए बजट देना शुरू कर दिया है। जिसके और सुखद परिणाम आगे देखने को मिलेंगे। यद्यपि बाघों के बढ़ने से मानव वन्यजीव संघर्ष की चुनौती भी बढ़ रही है।
    साकेत बडोला, निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर

    कार्बेट से आए पांचों बाघ राजाजी में सर्वाइव कर रहे हैं। अभी पांच और बाघ (एक नर व चार मादा) लाए जाने हैं। राजाजी में कार्बेट से लाए गए बाघों के बाद इनकी अच्छी खासी संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
    डा. कोको रोसो, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व, हरिद्वार

    कार्बेट से बाहर भी बाघों की मौजूदगी

    कार्बेट को बाघों की राजधानी तो कहा ही जाता है लेकिन इससे लगे रामनगर और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जंगल में भी बाघों की दहाड़ बढ़ी है।

    एनटीसीए की गणना के अनुसार मुताबिक रामनगर वन प्रभाग में 67 और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जंगल में 53 बाघों की मौजूदगी है। कार्बेट में बाघों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक से लैस कैमरों के साथ ही ड्रोन, मोटरबोट, एटीवी बाइक व हाथियों से गश्त की जाती है।

    बाघों के हमले में 16 वर्षों में 45 लोगों ने गवाई जान

    बाघों की संख्या बढ़ने से मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ी हैं। वर्ष 2009 से फरवरी 2026 तक कार्बेट, तराई व रामनगर वन प्रभाग क्षेत्र में बाघ के हमले में 45 लोगों की जान गई है। बाघों के बढ़ने से हमले की घटनाएं बढ़ना भी विभाग व सरकार के लिए चुनौती है।

    यह भी पढ़ें- International Tiger Day: बाघों की बढ़ती संख्या से दुधवा में बढ़ा मानव-वन्यजीव टकराव, गन्ने के खेत बने ठिकाना

    यह भी पढ़ें- International Tiger Day: आज चित्रकूट से गूंजेगा बाघ संरक्षण का संदेश, जुटेंगे प्रदेश भर के विशेषज्ञ