नैनीताल हाई कोर्ट का आदेश, अतिक्रमणकारियों को सुनवाई का मौका दिए बिना न हटाएं अतिक्रमण
नैनीताल हाई कोर्ट ने विभिन्न सरकारी और संस्थानिक भूमियों पर अतिक्रमण के मामलों की सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश दिया कि किसी भी अतिक्रमणकारी को बिना सुनवाई ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता से शपथपत्र पेश करने के दिए निर्देश. File

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने राज्य की सड़कों, नालों, सिचाई, वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्गों, नगर निकायों की भूमि के अलावा जीबी पंत हिमालयन इंस्टीट्यूट अल्मोड़ा की भूमि पर अतिक्रमण के मामले पर एक साथ सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी अतिक्रमणकारी का पक्ष सुने बिना, उनको सुनवाई का मौका दिए बिना उनके अतिक्रमण को न तोड़ा जाए।
कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता से शपथपत्र पेश करने को कहा है। 30 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि जहां पर अतिक्रमण हुआ है और अतिक्रमणकारियों का पक्ष सुनकर तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। अतिक्रमणकारियों की ओर से कहा गया कि प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों का पक्ष सुने बिना कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सीधे अतिक्रमण को तोड़ा जा रहा है।
नैनीताल के पदमपुरी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि और सड़क किनारे हुए अतिक्रमण से जुड़ा है, जिसकी शिकायत दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर की थी।
कोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका में बदलकर सुनवाई शुरू की और सरकार से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों और डीएफओ को निर्देश देकर कहा था कि हुए अतिक्रमण को हटाकर रिपोर्ट पेश करें। इसी मामले से जुड़े मामले में कोर्ट ने गोविंद बल्लभ पंत नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन इनवायरमेंट की भूमि पर हुए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई की, जिसमें कहा गया कि इंस्टीट्यूट की भी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है।