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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 13, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    पांडवों ने स्वर्ग जाने से पहले यहीं खाना खाया तो नाम पड़ा पंचाचूली, यहां रोमांच और सुकून का अनूठा संगम

    By Prashant MishraEdited By:
    Updated: Fri, 13 May 2022 07:31 PM (IST)

    पिथौरागढ़ में उच्च हिमालयी क्षेत्र में पंचाचूली पौराणिक व साहसिक खेलों का रोमांच समेटे हुए है। यहां मई से अक्टूबर तक यात्रा की जा सकती है। पंचाचूली की ...और पढ़ें

    पंचाचूली बेस कैंप तक जाने के लिए अब मौसम अनुकूल हो चुका है।
    पंचाचूली बेस कैंप तक जाने के लिए अब मौसम अनुकूल हो चुका है।

    ओपी अवस्थी, पिथौरागढ़। देश के मैदानी हिस्सों में झुलसा देने वाली गर्मी से राहत पाने और प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य को निहारना है तो हिमालय की गोद में आइए। पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील स्थित चीन सीमा से लगी उच्च हिमालयी दारमा घाटी का पंचाचूली बेस कैंप इस समय टूर व ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए अद्भुत जगह है। पंचाचूली बेस कैंप तक जाने के लिए अब मौसम अनुकूल हो चुका है।

    यहां मई से अक्टूबर तक यात्रा की जा सकती है। बर्फबारी के कारण बंद मार्ग भी खुल चुका है। पंचाचूली की पांच चोटियां पर्यटकों को बुला रही हैं। पांच चोटियों की तलहटी पर स्थित पंचाचूली बेस कैंप तक पहुंचने के लिए अब मात्र साढ़े तीन किलोमीटर ही पैदल चलना पड़ता है।

    पांडवों के चूल्हे ही पंचाचूली

    चीन सीमा से लगी दारमा घाटी स्थित पंचाचूली पर्वतमाला सभी को अपनी तरफ मुग्ध करती हैं। पंचाचूली की पांच चोटियां हिमालय का मुकुट भी हैं। इनका संबंध द्वापर युग से जोड़ा जाता है। स्कंद पुराण के मानस खंड में कहा गया है कि पांचों पांडव स्वर्गारोहण को गए तो उन्होंने अंतिम बार यहीं पर खाना बनाया। पांच चूल्हे लगाए गए। यही चूल्हे आज पंचाचूली के नाम से जाने जाते हैं।

    दूसरे नंबर की चोटी सबसे ऊंची

    बेहद आकर्षक पंचाचूली की दूसरे नंबर की चोटी सर्वाधिक ऊंची है। यह 6,904 मीटर की है। प्रथम चोटी की ऊंचाई 6,355 मीटर, तीसरी की 6,312 मीटर, चौथी की 6334 मीटर और पांचवीं चोटी की ऊंचाई 6,437 मीटर है। संपूर्ण हिमालय में पंचाचूली की चोटियों का आरोहण अत्यंत कठिन है।

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    इन पांच चोटियों की तलहटी पर स्थित है पंचाचूली बेस कैंप। यह समुद्र तल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर है। जबकि 13 हजार फीट की ऊंचाई पर पंचाचूली ग्राउंड जीरो है। जहां ग्लेशियर हैं। यहां पहुंचने के बाद प्रकृति का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

    ऐसे पहुंचें पंचाचूली बेस कैंप

    कभी अति दुर्गम माने जाने वाले पंचाचूली बेस कैंप तक पहुंचना अब बेहद आसान हो गया है। वर्ष 2018 में धारचूला-सोबला-तिदांग मार्ग बन जाने के साथ अब रास्ते में पडऩे वाले दुग्तू गांव तक वाहन से पहुंच सकते हैं। दुग्तू गांव से साढ़े तीन किमी का पैदल ट्रेक पूरा कर पंचाचूली बेस कैंप पहुंच जाते हैं।

    तीन किमी आगे चलने पर पंचाचूली का ग्राउंड जीरो है। दिल्ली से पंचाचूली बेस कैंप की दूरी 673 किमी है। यहां पहुंचने के लिए निकटस्थ रेलवे स्टेशन काठगोदाम (नैनीताल) और टनकपुर (चम्पावत) हैं। पंतनगर (ऊधम सिंह नगर) सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है। 

    काठगोदाम से धारचूला की दूरी 370 किमी व टकनपुर से 244 किमी है। काठगोदाम से अल्मोड़ा, सेराघाट, डीडीहाट, धारचूला होते हुए या दुग्तू गांव पहुंचा जाता है। जबकि टनकपुर से चम्पावत, पिथौरागढ़, धारचूला होते हुए दुग्तू का सफर पूरा होता है। धारचूला से दुग्तू की दूरी करीब 80 किमी है।

    मई से 15 अक्टूबर तक रौनक

    कोरोना काल से पूर्व वर्ष 2018, 2019 तक प्रतिवर्ष यहां 10 से 12 हजार पर्यटक पहुंचने लगे थे। यहां मई से 15 अक्टूबर तक टूर और ट्रेकिंग सीजन रहता है। दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल समेत विभिन्न राज्यों और विदेश से ट्रेकर यहां पहुंचते हैं। 15 अक्टूबर के आसपास यहां मौसम बदल जाता है और आपदा की दृष्टि से भी जोखिम बढ़ जाता है।

    प्रवास के लिए है होमस्टे व इग्लू की सुविधा

    2018 में चीन सीमा को जोडऩे वाला दारमा मार्ग बनने के बाद से हजारों की संख्या में पर्यटक व ट्रेकर पंचाचूली बेस कैंप पहुंचने लगे हैं। जिसे देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने होमस्टे भी बनाए हैं। जिनमें स्थानीय लोग ही लोकल व्यंजन पर्यटकों को परोसते हैं। खान-पान में मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा, भात (चावल), पल्थी यानी ऊगल की रोटी, सब्जी व हलवा खास होता है।

    होमस्टे में एक दिन का रहने का खर्च करीब 1000-1200 रुपये प्रति व्यक्ति रहता है। पंचाचूली बेस कैंप में कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की हट और इग्लू (बर्फ के घर) बने हैं। जहां पर एक दिन के प्रवास का खर्च करीब डेढ़ हजार रुपये प्रति व्यक्ति है।

    निजी संस्था कराती है टूर

    पंचाचूली बेस कैंप तक टूर व ट्रेकिंग का संचालन निजी संस्थाएं भी कराती हैं। इसमें हल्द्वानी से बेस कैंप तक लाने-ले जाने पर प्रति व्यक्तिकरीब सात से आठ हजार का खर्च आता है। यह टूर चार दिन व तीन रात का रहता है।

    हर तरफ नदी, ग्लेशियर व बुग्याल के दर्शन

    सीमांत जिले की तीन उच्च हिमालयी घाटियों में दारमा घाटी सबसे खूबसूरत है। पंचाचूली बेस कैंप तक जाते वक्त धारचूला से तवाघाट तक काली नदी, फिर दुग्तू तक धौली नदी किनारे-किनारेसफर रहता है। 

    बीच-बीच में सड़क से ही लगे ग्लेशियर और बालिंग क्षेत्र में भोजपत्र के विशाल पेड़ भी आपको दिखेंगे। ग्लेशियरों से निकलने वाले झरने व नाले बरबस ही मन को मोह लेंगे। यहां के बुग्याल (घास के मैदान) नयनाभिराम हैं। इसी मार्ग में राष्ट्रीय महत्व की धौलीगंगा जल विद्युत परियोजना का बांध स्थल भी है।