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    प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी के भूमि विवाद में उत्तराखंड हाई कोर्ट सख्त, एसडीएम-एसएचओ तलब

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 07:07 PM (IST)

    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने किच्छा के कुलसुम खान फार्म विवाद में एसडीएम और एसएचओ को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें

    उत्तराखंड हाई कोर्ट।

    उत्तराखंड हाई कोर्ट।

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने किच्छा भूमि विवाद में सख्त रुख अपनाया

    2. एसडीएम और एसएचओ को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से बुलाया

    3. सिविल कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा

    जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा में पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म पर जबरन कब्जा करने के बाद, महिलाएं, बच्चों व बेजुबान पशुओं को सुरक्षा मुहैया कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की।

    कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एसडीएम सहित संबंधित कोतवाली के एसएचओ को सोमवार छह जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है।

    साथ ही सिविल कोर्ट के 11 जून के आदेश का सख्ती से अनुपालन करने को कहा है। अगली सुनवाई को सोमवार छह जुलाई की तिथि नियत की है।

    शुक्रवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में सिकंदर आलम खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ पर स्थित कुलसुम खान फार्म है।

    प्रथम पक्ष कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी, जबकि दूसरा पक्ष नसरीन सांगा है। दोनों ही पक्ष इस फार्म पर अपना अधिकार बता रही हैं, जबकि यह फार्म हाउस उनकी बुआ कुलसुम खान का है।

    कुलसुम खान ने अपनी यह वसीयत सायरा और उनके चचरे भाई सिकंदर आलम खान के नाम 2024 में की थी। बुआ की मृत्यु 18 दिसंबर 2025 को हो गई थी।

    जैसे ही इसकी खबर दूसरे पक्ष (बुआ की बहन) को लगी तो वह छह लोगों के साथ इस पर कब्जा करने के लिए आ गए और प्रसाशन की मिलीभगत से फार्म पर कब्जा कर लिया गया।

    वहां पर रह रहे पुरूषों को बाहर कर दिया तथा महिलाओं, बच्चों और बेजुबानों को बाहर जाने पर रोक लगा दी। आरोप लगाया कि उनके साथ अभद्रता की जा रही है। बीते तीन दिनों से अंदर ही बंद हैं।

    इस संबंध में प्रसाशन से बात की और कहा कि उनके पास ओरिजिनल रजिस्टर्ड वसीयत है, उनको 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट से इस मामले में स्टे मिला है।

    आदेश की प्रति भी दिखाई लेकिन प्रसाशन और दूसरे पक्ष के लोगों ने कोर्ट के आदेश को नहीं मानते हुए दूसरे पक्ष के नसरीन सांगा को कब्जा दिला दिया।

    याचिका में इसे कोर्ट के आदेश की अवमानना करार देते हुए मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की प्रार्थना की है।

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