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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

नैनीताल में चुंगी और पार्किंग की अब इलेक्ट्रॉनिक पर्ची मिलेगी nainital news

By Skand ShuklaEdited By:
Updated: Thu, 21 Nov 2019 11:18 AM (IST)

हाई कोर्ट ने नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी डिस्ट्रिक स्पोट्र्स एसोसिएशन बीडी पांडे अस्पताल के समीप तथा अंडा मार्केट कार पार्किंग का ठेका निरस्त करने संबंधी डीएम तथा नगरपालिका का आदेश

नैनीताल में चुंगी और पार्किंग की अब इलेक्ट्रॉनिक पर्ची मिलेगी nainital news
नैनीताल में चुंगी और पार्किंग की अब इलेक्ट्रॉनिक पर्ची मिलेगी nainital news

नैनीताल, जेएनएन : हाई कोर्ट ने नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी, डिस्ट्रिक स्पोट्र्स एसोसिएशन, बीडी पांडे अस्पताल के समीप तथा अंडा मार्केट कार पार्किंग का ठेका निरस्त करने संबंधी डीएम तथा नगरपालिका का आदेश रद कर दिया है। कोर्ट ने ठेकेदारों को कब्जा देने के निर्देश नगरपालिका को दिए हैं। साथ ही चुंगी व पार्किंग में इलेक्ट्रॉनिक पर्ची के लिए बूम बैरियर लगाने के निर्देश ठेकेदारों को दिए हैं।

दरअसल नैनीताल निवासी अरुण साह ने ठेकेदारों पर पालिका को किश्त जमा नहीं करने व अन्य टेेंडर शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए डीएम को शिकायती पत्र सौंपा था। आरोप लगाया था कि चुंगी व पार्किंग की रसीद इलेक्ट्रानिक के बजाय मैनुअल दी जा रही है। लेकब्रिज चुंगी व पार्किंग की किश्तें भी समय पर जमा नहीं की जा रही हैं। जिस पर डीएम द्वारा एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेेटी बनाई गई। बीते सात अक्टूबर को जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने लेक ब्रिज चुंगी व डीएसए तथा बीडी पांडे अस्पताल के समीप की पार्किंग का टेंडर निरस्त करने का आदेश पालिका को दिया। 14 अक्टूबर को  पालिका ने ठेका निरस्त कर चुंगी व पार्किंग पर कब्जा ले लिया।

डीएम व पालिका के इस आदेश को टोल संचालक एमपी इंटरप्राइजेज, विशेष इंटरप्राइजेज व नरेंद्र शर्मा द्वारा याचिका के जरिये हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने मामले में बहस करते हुए कहा कि ठेका निरस्त करने का क्षेत्राधिकार डीएम के पास नहीं है। साफ किया कि नगर निकाय एक्ट की धारा-24 एक क में डीएम को पालिका के प्रस्ताव पर रोक लगाने का अधिकार है। यह भी कहा कि ठेके की किश्त जमा करने में देर हुई मगर किश्त जमा की गई थी। जांच कमेटी द्वारा ठेकेदारों का पक्ष तक नहीं लिया गया। वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद ठेका निरस्त करने का डीएम व पालिका का आदेश रद कर दिया। 

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