उत्तराखंड में 57 वन आरक्षी बने जंगल के नए सुरक्षा कवच, गौरव कुमार ने जीता स्वर्ण पदक
उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी, हल्द्वानी में 57 वन आरक्षियों ने छह महीने का प्रशिक्षण पूरा किया। देहरादून वन प्रभाग के गौरव कुमार को सर्वश्रेष्ठ प ...और पढ़ें

हल्द्वानी एफटीआइ में आयोजित वन आरक्षी प्रशिक्षण प्रथम वर्ष के दीक्षा समारोह के दौरान परेड करते वन आरक्षी। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। रामपुर रोड स्थित उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (यूएफटीए) में छह महीने का प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 57 वन आरक्षी का दीक्षा समारोह हुआ। इन्हें केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश गोयल ने प्रमाण पत्र वितरित किए। ये वन आरक्षी अब प्रदेशभर के जंगलों के सुरक्षा कवच बनेंगे।
शुक्रवार सुबह दीक्षा समारोह की शुरुआत पासिंग आउट परेड के साथ हुई। इसमें प्रथम सत्र के वन आरक्षियों ने बैंड की धुन पर मार्च पास्ट किया। इसके साथ ही मुख्य अतिथि गोयल को सलामी दी। परेड के बाद पंडित नैन सिंह आडिटोरियम में 57 वन आरक्षियों को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक प्राप्त करने पर प्रमाण पत्र दिया गया।
इस दौरान अपर प्रमुख वन संरक्षक वन अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रबंधन सुरेंद्र मेहरा, यूएफटीए के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान डा. विनय भार्गव, उपनिदेशक सूरज तिवारी, आशीर्वाद कटियार और सेवानिवृत्त डीएफओ बलवंत साही सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
जनता के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार की दी सीख
मुख्य अतिथि गोयल ने वन आरक्षियों को सीख देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद असली परीक्षा अब शुरू होती है। आपकी छवि ही विभाग की छवि बनाएगी। इसलिए जनता के साथ गरिमापूर्ण और जिम्मेदारी भरा व्यवहार रखें। इसके बाद उन्होंने अकादमी परिसर में ही रिंगाल बैम्बू सावेनियर शाप, फारेस्ट लैब और प्रशिक्षण नर्सरी का उद्घाटन किया।
उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आइएफएस चंद्र प्रकाश गोयल वर्ष 1989 में हल्द्वानी यूएफटीए के उपनिदेशक रह चुके हैं। अभी वह सीईसी के अध्यक्ष हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण और वन संरक्षण से जुड़े मामलों पर सलाह देने और उनकी निगरानी के लिए गठित किया है।
खबरें और भी
मैकेनिकल इंजीनियर गौरव कुमार का दबदबा
समारोह में मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले देहरादून वन प्रभाग के वन आरक्षी गौरव कुमार ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने वन वर्धन, वन उपयोग और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षु की ट्राफी भी जीती।
वहीं अल्मोड़ा वन प्रभाग के सौरभ सिंह जीना को 'परेड कमांडर ट्राफी' से सम्मानित किया गया। गोविंद वन्य जीव विहार राष्ट्रीय पार्क के गणेश चौहान ने दूसरा, रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के वीरेंद्र सिंह ने तीसरा, रामनगर वन प्रभाग के राहुल लाल ने चौथा और लैंसडौन वन प्रभाग के प्रताप चंद ने पांचवां स्थान प्राप्त किया। शीर्ष पांच प्रशिक्षणार्थियों को साइकल भेंट की गई।
अन्य राज्य भी अपनाएं अनुसंधान के कार्य
सीईसी अध्यक्ष चंद प्रकाश गोयल ने हल्द्वानी में बायोडायवर्सिटी पार्क और लालकुआं में अनुसंधान केंद्र का दौरा किया। वह अनुसंधान वृत्त के कार्यों को देखकर बेहद प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि संभवत: भारत में वानिकी अनुसंधान में सबसे अच्छे कार्य यहीं पर हो रहे हैं। खास तौर पर तत्कालीन सीसीएफ (अनुसंधान) संजीव चतुर्वेदी के कार्यकाल में दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षित करने के लिए जो सराहनीय कार्य हुए हैं, उन्हें अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए।