रुद्रपुर में दुष्कर्म के आरोपितों की सार्वजनिक परेड पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार व पुलिस से मांगा जवाब
नैनीताल हाई कोर्ट ने रुद्रपुर में दुष्कर्म के आरोपितों की सार्वजनिक पिटाई और परेड के मामले में राज्य सरकार व पुलिस से जवाब मांगा है। ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट में 28 जुलाई को ऊधमसिंह नगर जिले के रुद्रपुर में दुष्कर्म मामले के गिरफ्तार आरोपितों को पुलिस व जनता की ओर से बीच बाजार में पिटवाने और सार्वजनिक रूप से परेड करवाने का मामले पर सुनवाई हुई।
आरोपितों के नाम की बिना मास्क लगाए फोटो और वीडियो के साथ ही पुलिस के आधिकारिक इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश
कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार सहित अन्य पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में राज्य सरकार, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक तथा पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था को पक्षकार बनाया गया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई।
जिसमें कहा गया है कि हाल के वर्षों में आरोपित या गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक परेड, मीडिया के सामने पेश करने तथा उनकी फोटो और वीडियो आदि पुलिस की ओर से प्रसारित करने की घटनाएं इंटरनेट मीडिया पर डाली जा रही है। ऐसी कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत मिले अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस घटना के बाद 28 जुलाई 2026 को पुलिस महानिदेशक को विस्तृत प्रत्यावेदन भेजकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे राज्य के लिए पुलिस बल के प्रयोग, गिरफ्तार व्यक्तियों के सम्मान, मीडिया से संवाद तथा फोटो-वीडियो जारी करने संबंधी एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाने की मांग की गई है।
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याचिका में राज्य सरकार और पुलिस विभाग को गिरफ्तार व्यक्तियों की सार्वजनिक पिटाई, सार्वजनिक अपमान, मीडिया ट्रायल तथा आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उनकी पहचान उजागर करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। साथ ही गिरफ्तारी, हिरासत, बल प्रयोग, मीडिया से संवाद और जवाबदेही तय करने के लिए राज्यव्यापी एसओपी तैयार करने तथा पहले से आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आरोपितों के फोटो, वीडियो और पहचान संबंधी सामग्री की समीक्षा कर आवश्यक होने पर हटाने या पहचान छिपाने के निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।