दूरदराज में अकेले रह रहे बुजुर्गों को सुविधाएं न मिलने पर नैनीताल हाई कोर्ट गंभीर, सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल हाई कोर्ट ने दूरदराज के इलाकों में अकेले रह रहे बुजुर्गों को आवश्यक सुविधाएं न मिलने पर गंभीर रुख अपनाया है।


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जागरण संवाददाता, नैनीताल। हाई कोर्ट ने राज्य के दूरदराज के इलाकों में रह रहे बुजुर्गों को जरूरी सुविधा नहीं दिए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने बुजुर्गों की देखरेख, सुरक्षा व सुविधाओं के मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में अधिवक्ता दीपा आर्या की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि प्रदेश के कई बुजुर्ग व और बच्चे गावं के दूर दराज क्षेत्रों में रहते हैं। उनको तय समय पर मिलने वाली जरूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है, यही नहीं बच्चों को मिड डे मील भी नहीं दिया जा रहा है। बच्चों को एक्सपायरी तिथि का भोजन दिया जा रहा है।
संवैधानिक अधिकारों से वंचित
उन्होंने पर्वतीय जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि पलायन की वजह से गांव में केवल बुजुर्ग ही बचे हुए हैं। वह पैतृक गांव में अकेले रहते हैं। उनको सुविधाएं-सुरक्षा के साथ ही संवैधानिक अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है।
उनकी देखरेख करने वाला कोई नहीं हैं। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
याचिकाकर्ता के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जिलों से बुजुर्गों व उनकेा दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी गई लेकिन नहीं दी गई। हाई कोर्ट ने अब सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि मामले में जवाब दाखिल किया जाए।
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