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Uttarakhand Monsoon Travel: अगस्त के बाद घूमने के लिए पहाड़ के ये कम भीड़ वाले डेस्टिनेशन

By Nirmala BohraEdited By: Nirmala Bohra
Published: Fri, 21 Aug 2026 04:49 PM (IST)Updated: Fri, 21 Aug 2026 09:28 PM (IST)

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, खासकर मानसून में यहां के पर्वतीय इलाके मनमोहक लगते हैं।

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

निर्मला बोहरा, ऑनलाइन डेस्क। उत्तराखंड अपनी प्राकृितक सुंदरता के लिए दुनियाभर में अलग पहचान बनाए हुए है। यहां के पर्वतीय इलाके बरबस ही अपनी ओर खींच लेते हैं। कोई भी मौसम हो पर्यटकों को यहां आकर सुकून के पल बिताना पसंद आता है। यहीं वजह है कि अक्सर वीकेंड और अवकाश पर उत्तराखंड पर्यटन स्थल पर्यटकों से पैक हो जाते हैं। 

मानसून में उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में स्वर्ग से नजारे देखने को मिलते हैं। यहां बादल पहाड़ों को छूते नजर आते हैं। ओस की बूंदें और मखमली घास तनमन को तरोजाता कर देती है। ठंडी हवा और गुनगुनी धूप शरीर की सारी थकान दूर कर देती है। आज हम आपको ऐसे ही पांच इलाकों के बारे में बताने जा रहे हैं। जो मानूसन के दौरान घूमने की बेस्ट डेस्टिनेशन हैं।

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फूलों की घाटी (Valley of Flowers) 

  • विश्व धरोहर फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में है।
  • फूलों की घाटी कुल 87.5 वर्ग किमी में फैली हुई है। 
  • फूलों की घाटी में सुबह जाकर सांय पांच बजे तक वापस आना जरूरी है।
  • फूलों की घाटी घूमने का सबसे अच्छा टाइम जुलाई से सितंबर के बीच का होता है। इस दौरान मानसून की बारिश से पूरी घाटी रंग-बिरंगे फूलों और हरियाली से सराबोर रहती है। 
  • देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक फूलों की घाटी की दुर्लभ जैव विविधता और रंग-बिरंगे पुष्पों का दीदार करने पहुंचते हैं। 
  • फूलों की घाटी प्रत्येक वर्ष एक जून को खुलकर 31 अक्टूबर को पर्यटकों के लिए बंद हो जाती है।
  • यहां पर हिमालयन थार, कस्तुरा मृग, हिम तेंदुआ सहित अन्य जंगली जानवर घूमते देखे जाते हैं।
  • फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। 
  • यहां पर हर पंद्रह दिनों में फूलों की अलग प्रजाति खिलने से घाटी का रंग भी बदल जाता है।

कैसे पहुंचें?

बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग-ज्योतिर्मठ-गोविंदघाट-बेस कैंप घांघरिया-फूलों की घाटी।

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लैंसडौन (Lansdowne)

  • उत्तराखंड के पौड़ी जिले में लैंसडौन बेहद शांत, खूबसूरत और साफ-सुथरा पर्यटन स्थल है। 
  • लैंसडौन को पहाड़ों का सहजादा नगर कहा जाता है।
  • यह दिल्‍ली से मात्र 280 किमी की दूरी पर स्थित है। 
  • लैंसडौन में आप भूल्ला लेक, दरबार सिंह म्यूजियम, टिप-इन-टाप, चर्च, संतोषी माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, कालेश्वर महादेव, राठी प्वाइंट, ताड़केश्वर महादेव और माल रोड पर सैर-सपाटा कर सकते हैं।

कैसे पहुंचें?

दिल्ली-कोटद्वार-लैंसडौन।

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ऋषिकेश (Rishikesh)

  • मानसून में ऋषिकेश में आप बीटल्स आश्रम (चौरासी कुटिया), वशिष्ठ गुफा, भूतनाथ मंदिर और नीलकंठ मार्ग पर प्रकृति को करीबी से देख सकते हैं। ये इलाके शांत और कम भीड़भाड़ वाले हैं।
  • बारिश के बीच ऋषिकेश के मरीन ड्राइव, जिसे आस्था पथ भी कहा जाता है पर आप घूम सकते हैं।
  • मानसून में गंगा घाट और भी ज्यादा सुंदर लगते हैं। बादल नदियों को छू रहे होते हैं। शाम के समय होने वाली गंगा आरती में शामिल हो सकते हैं।
  • क्यार्की व्यू पॉइंट पर जा सकते हैं। यहां से पूरा शहर साफ दिखाई देता है।

कैसे पहुंचें?

टैक्सी, बस और ट्रेन द्वारा ऋषिकेश पहुंचा जा सकता है।

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मालदेवता (Maldevta)

  • मालदेवता देहरादून के रायपुर में सोंग नदी के किनारे बसा शांत प्राकृतिक पर्यटन स्थल है।
  • यहां हरे-भरे पहाड़, झरनें और नदी की कल-कल आपका मन मोह लेगी।
  • मानसून में ये इलाका और ज्यादा हराभरा हो जाता है। 
  • यहां पहाड़ बादलों से ढक जाते हैं।
  • चारों तरफ से पर्वतों से घिरा मालदेवता देहरादून में पर्यटकों की फेवरेट डेस्टिनेशन है।

कैसे पहुंचें?

दिल्ली-देहरादून-मालदेवता।

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फोटो: इंटरनेट मीडिया। 

भवाली

  • नैनीताल जिले में स्थित भवाली बेहद शांत और सुंदर हिल स्टेशन है। 
  • यह हिल स्टेशन चीड़ के जंगलों से घिरा है।
  • यहां श्यामखेत चाय बागान प्रमुख आकर्षण स्थल है। 
  • भवाली से कैंची धाम भी बेहद करीब है।
  • मैदानों की तपिश और भागमभाग से बचने के लिए पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचें?

दिल्ली-हल्द्वानी-भवाली।

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जरूरी सुझाव

  • मौसम पूर्वानुमान देखकर ही अपनी ट्रिप प्लान करें।
  • पहाड़ों पर बारिश के समय संभलकर गाड़ी चलाएं।
  • भूस्खलन की खबरों पर नजर रखें।
  • छाता, रेनकोट और मजबूत जूते साथ रखें।

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