यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
World Mental Health Day 2022 : अंदर से आवाज आए कि कुछ ठीक नहीं, तो समझें डिप्रेशन होने लगा
World Mental Health Day 2022 जब आपका मन किसी काम में नहीं लग रहा हो और जीवन भी निरर्थक लगने लगे अंदर से आवाज आने लगे कि अब कुछ ठीक नहीं रहा। तब समझ ज ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : World Mental Health Day 2022 : जब आपका मन किसी काम में नहीं लग रहा हो और जीवन भी निरर्थक लगने लगे, अंदर से आवाज आने लगे कि अब कुछ ठीक नहीं रहा। तब समझ जाएं कि डिप्रेशन होने लगा है। इसलिए समय रहते सचेत हो जाएं। बीडी पांडे अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. गिरीश पांडेय बताते हैं, ऐसी मनोस्थिति में खुद को संभालने की जरूरत होती है।
घबराने के बजाए इस मानसिक समस्या का समाधान करवाएं। समय रहते मनोचिकित्सक व मनोविज्ञानी से परामर्श ले सकते हैं। डा. पांडेय रविवार को दैनिक जागरण के हैलो डाक्टर कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्होंने 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस को लेकर कुमाऊं भर से फोन करने वाले लोगों को परामर्श दिए। निजता के चलते हम फोन करने वाले मरीजों के नाम प्रकाशित नहीं कर रहे हैं।

हैलो डाक्टर में डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों के फोन सबसे अधिक थे। इस पर डा. पांडेय ने बताया कि डिप्रेशन ऐसी स्थिति है, जब मन में बहुत अधिक नकारात्मकता हावी रहती है। उदासी, चिंता, तनाव हताशा मन को घेर लेती है। धीरे-धीरे सोचने-समझने की क्षमता खत्म होने लगती है। यहां तक कि आत्महत्या जैसे विचार पनपने लगते हैं। डिप्रेशन की गंभीर स्थिति में आत्महत्या जैसे मामले सामने आते हैं।
डिप्रेशन के ये हैं मुख्य कारण
- जीवनशैली में बदलाव
- प्रतिस्पर्धात्मक माहौल
- समय पर भोजन नहीं करना
- अनियमित दिनचर्या
- जेनेटिक यानी परिवार में पहले होना
- किसी करीबी का गुजर जाना
- गंभीर घटना होना
- नौकरी जाना या आर्थिक नुकसान
सवाल- स्वजनों का दबाव कि शादी करो, लेकिन मैं शादी के नाम से घबराता हूं? क्या करूं?
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30 वर्षीय युवक, खटीमा
डाक्टर- यह एंग्जाइटी के लक्षण हैं। इसलिए आप मनोचिकित्सक को दिखा लें और मनोविज्ञानी से काउंसलिंग करा लें। समस्या ठीक हो जाएगी।
सवाल- एक विचार बार-बार मन में आता है। इससे बहुत अधिक परेशानी होती है।
डाक्टर- इस मानसिक बीमारी को ओसीडी कहते हैं। इसमें सामान्य तौर पर तीन तरह के लक्षण दिखते हैं, जैसे कि बार-बार चीजों काे चेक करना, एक विचार के बार-बार आना व बार-बार हाथ धोना या सफाई करना। ऐसे लोगों को काउंसलिंग की जरूरत रहती है।
सवाल- मेरा बच्चा कक्षा 10 में है। उसके नंबर भी कम आते हैं और हर समय तनाव जैसी स्थिति में रहता है।
डाक्टर- कभी भी बच्चों की तुलना दूसरों से न करें। नंबर आने चाहिए, लेकिन कम होने पर मानसिक दबाव में आने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह सफलता की गारंटी नहीं है। यानी कि सही रणनीति की जरूरत होती है। विषय को समझने और निरतंता अभ्यास करें। इससे तनाव भी कम होगा और सफलता भी मिलेगी।