उत्तराखंड में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिशु हथिनी का किया नामकरण, मालन नदी से बचाई गई थी 'मालिनी'
कालागढ़ में चार सितंबर को मालन नदी से बचाई गई शिशु हथिनी का नामकरण संस्कार हुआ। वन मंत्री सुबोध उनियाल की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उसे 'म ...और पढ़ें

मादा शिशु को दध पिलाते वन मंत्री सुबोध उनियाल। जागरण

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संवाद सूत्र, कालागढ़ (कोटद्वार)। बीते चार सितंबर को कण्वाश्रम के समीप मालन नदी के तेज भंवर में फंसने के बाद गंभीर रूप से घायल हुई शिशु हथिनी अब मालिनी नाम से ही पहचानी जाएगी।
प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिशु हथिनी का नामकरण संस्कार किया गया।
गुरुवार शाम कालागढ़ स्थित एलीफैंट कैंप में आयोजित समारोह के दौरान छह माह की शिशु हथिनी का विधि-विधान से नामकरण संस्कार संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल रहे।
पंडित हरीश ध्यानी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कर हाथी के शिशु का नामकरण संस्कार संपन्न करवाया व उसका नाम मालिनी रखा गया।
नामकरण संस्कार के बाद कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र, कालागढ़ में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे वन कर्मियों को संबोधित करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव मानव जीवन पर गंभीर रूप से पड़ेगा।
कहा कि वन विभाग के प्रयासों से जनजागरण कर इस चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने, वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने व वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा, कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला, उपनिदेशक राहुल मिश्रा, कालागढ़ टाइगर रिजर्व फारेस्ट के डीएफओ तरुण एस, उपप्रभागीय वनाधिकारी बिंदरपाल, वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रूबाली, इंद्र सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक डा.शैलेंद्र मोहन सिंघल, वन दरोगा भारत सिंह रावत और हाथी शिशु के तीमारदार रूपन, बीर, लोहित, गुरदासपुर और मनोज सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
मालिनी नदी में गंभीर घायल मिली थी हथिनी
बताते चलें कि बीते वर्ष चार सितंबर को वन कर्मियों ने कण्वाश्रम क्षेत्र में मालन नदी के भंवर में फंसी एक हथिनी को रेस्क्यू किया। इस हथिनी को कालागढ़ स्थित हाथीशाला में लाया गया, जहां कार्बेट टाइगर रिजर्व के पशुचिकित्सक डा.दुष्यंत कुमार शर्मा की देख-रेख में शिशु हथिनी का उपचार किया गया।
वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रुबाली ने बताया कि जब हथिनी को हाथीशाला में लाया गया, उसका वजन एक कुंतल 250 ग्राम था। एक जनवरी 2026 को इसका वजन बढ़कर 1.60 कुंतल हो गया है।
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