ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: ट्रेन की खिड़की से दिखेगा मां धारी देवी का अलौकिक रूप
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत धारी देवी स्टेशन और सुरंग-12 को जोड़ने के लिए अलकनंदा नदी पर 204.80 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया ह ...और पढ़ें

धारी देवी मंदिर के समीप रेल परियोजना का निर्माणाधीन पुल। जागरण।
HighLights
धारी देवी स्टेशन को सुरंग-12 से जोड़ेगा नया पुल
अलकनंदा नदी पर 204.80 मीटर लंबा पुल बन रहा है
एक वर्ष में पुल निर्माण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित
विनय बहुगुणा, श्रीनगर गढ़वाल। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत धारी देवी स्टेशन और सुरंग-12 को जोड़ने के लिए अलकनंदा नदी पर 204.80 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
आरवीएनएल समेत कार्यदायी संस्था ने एक वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस पुल से यात्री धारी देवी के दर्शन भी कर सकेंगे। इसके साथ ही रेल परियोजना में अन्य पुलों का कार्य भी तेजी से चल रहा है।
रेल परियोजना को पहाड़ के विषम भूगोल और प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से सुलभ एवं सुरक्षित यातायात के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
परियोजना के तहत शिवानंदी में रेल लाइन पर पटरी बिछाने के साथ धारी देवी के समीप अलकनंदा नदी पर पुल का कार्य भी शुरू हो चुका है। यह पुल धारी देवी स्टेशन को सुरंग-12 से जोड़ेगा।
वहीं, आरवीएनएल ने धारी देवी स्टेशन के निर्माण को टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। स्टेशन का कार्य दूसरे चरण में होना है। रेल लाइन निर्माण में आरवीएनएल नई तकनीकों का उपयोग कर रहा है, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और विषम परिस्थितियों में नुकसान की संभावना कम से कम हो।
आरवीएनएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी ने बताया कि परियोजना पर सुरंग-11 को जोड़ने के लिए तीन अलग-अलग लंबाई के पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है, जो मुख्य सुरंग के साथ निकास सुरंग को जोड़ने का कार्य करेंगे। इनमें पहला पुल 51.05 मीटर लंबा, दूसरा 11.05 मीटर लंबा और तीसरा 75 मीटर लंबा है।
परियोजना पर एक नजर
- वर्ष 2019 में शुरू हुआ कार्य, दिसंबर 2028 में होगा पूर्ण
- कुल लागत: 16216 करोड़ रुपये
- रेल लाइन की लंबाई 125 किमी
- 16 सुरंगों से होकर गुजरेगा 119 किमी हिस्सा
- परियोजना पर 19 पुलों का होगा निर्माण
- सबसे लंबी सुंरग 14.08 किमी (देवप्रयाग से जनासू के बीच)
- सबसे छोटी सुरंग 200 मीटर (सेवई से कर्णप्रयाग के बीच)
- 11 सुरंगों की लंबाई छह किमी से अधिक
- परियोजना पर बनेंगे 13 स्टेशन
पांच जिले परियोजना में शामिल
यह परियोजना गढ़वाल क्षेत्र को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं हर मौसम में रेल संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है। इससे बार-बार भूस्खलन एवं प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कमजोर सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी। परियोजना में पांच जिले देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग व चमोली शामिल हैं।