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    सोनप्रयाग में एसटीपी नहीं, बिना इलाज सीधे मंदाकिनी में गिर रहा गंदा पानी; RTI में बड़ा खुलासा

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 12:48 PM (IST)

    सोनप्रयाग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न होने से मंदाकिनी नदी प्रदूषित हो रही है, जिससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और केदारघाटी की जीवनधारा खतर ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय से निकलकर बाबा केदार के चरणों का स्पर्श करती मंदाकिनी सिर्फ नदी नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ केदारघाटी व मंदाकिनी घाटी की जीवनधारा भी है। लेकिन, बढ़ते मानवीय दबाव के चलते वह केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव सोनप्रयाग से ही दूषित हो रही है।

    यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने से होटल, लाज और अन्य प्रतिष्ठानों के साथ आवासीय भवनों का सीवेज सीधे मंदाकिनी में गिर रहा है। सूचना के अधिकार में स्वयं गंगा प्रदूषण इकाई श्रीनगर गढ़वाल ने बताया कि सोनप्रयाग में कोई एसटीपी प्लांट नहीं हैं। वहीं, गौरीकुंड में भी 200 एमएलडी क्षमता के सिर्फ दो सुलभ शौचालय ही एसटीपी से जुड़े हैं। बाकी यहां अन्य कोई व्यवस्था नहीं है।

    सोनप्रयाग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर शासन स्तर पर कोई योजना तक नहीं बन पाई। नोएडा निवासी पर्यावरण प्रेमी अमित गुप्ता ने सूचना का अधिकार में केदारनाथ से लेकर सोनप्रयाग तक मंदाकिनी नदी की स्वच्छता को लेकर जानकारी मांगी थी।

    उन्होंने पूछा था कि सीवेज के निस्तारण के लिए सोनप्रयाग व गौरीकुंड में कितनी क्षमता के एसटीपी बनाए गए हैं। इस संबंध में उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, परियोजना प्रबंधक निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) श्रीनगर ने बीती 18 जुलाई को बताया कि सोनप्रयाग में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कोई सुविधा नहीं है। गौरीकुंड में भी महज दो सुलभ शौचालय ही एसटीपी से जुड़े हैं।

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    बता दें कि एक अन्य सूचना के अधिकार के जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केदारनाथ व गौरीकुंड में मंदाकिनी नदी में गिर रहे गंदे पानी से दूषित होने की बात भी कही गई थी। तब कहा गया था कि दोनों स्थानों पर मंदाकिनी नदी में बीओडी, सीओडी और फीकल कोलीफार्म की मात्रा मानक से कई अधिक है।

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    इधर, सोनप्रयाग में एसटीपी नहीं होना मंदाकिनी की स्वच्छता को लेकर और भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। केदारनाथ दर्शन को रोजाना सोनप्रयाग और गौरीकुंड पहुंचने वाले कुल यात्रियों का 40 से 50 प्रतिशत ही यहां प्रवास करता है। बावजूद इसके यहां सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था के नाकाफी इंतजाम कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

    सोनप्रयाग में अभी एसटीपी की कोई सुविधा नहीं है। वहां सेप्टिक टैंक बनाए गए हैं, जिससे सीवेज का ट्रीटमेंट हेाता है। अब 10 व 16 एमएलडी के दो एसटीपी की योजना है, जिसमें क्रमश: 15 व 10 शौचालय जोड़े जाएंगे।

    - रवींद्र गंगाड़ी, परियोजना प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा), श्रीनगर गढ़वाल