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    अरे ये क्‍या हो गया? बर्फ से लकदक रहने वाले हिमालयी गांवों में उड़ रही है धूल, निचली घाटियों में पड़ा सूखा

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 05:55 PM (IST)

    धारचूला सहित हिमालयी क्षेत्रों में इस वर्ष शीतकाल में असामान्य रूप से कम हिमपात और बारिश हुई है। जनवरी का आधा महीना बीतने के बाद भी निचले इलाकों में स ...और पढ़ें

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    संवाद सूत्र, धारचूला। शीतकाल में इस वर्ष मौसम पूरी तरह रुठा हुआ है। जनवरी माह का पहला पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी हिमालयी क्षेत्र हिमपात से वंचित है। निचली घाटियों में न हिमपात हो रहा और नहीं बारिश। हिमालयी गांवों में चल रही तेज हवाओं से उड़ रही धूल से ग्रामीण परेशान हैं।

    कैलास मानसरोवर यात्रा पथ में पिछले वर्षों तक इन दिनों दो से तीन फुट तक हिमपात हो जाया करता था, लेकिन इस वर्ष अभी तक इस क्षेत्र के गांव बूंदी, कुटी, गुंजी, गर्ब्यांग, रौंककांग, नाबी हिमपात से वंचित हैं। ऊंचे शिखरों पर भी नाममात्र का हिमपात हो रहा है।

    'ऊं' पर्वत इन दिनों खाली-खाली दिखाई दे रहा है। नब्बे वर्षीय मंगल सिंह गुंज्याल का कहना है कि मौसम की ऐसी बेरुखी उन्होंने अपने जीवनकाल में कभी नहीं देखी। शीतकाल में जहां तीन से चार फिट बर्फ होती थी वह क्षेत्र पूरी तरह खाली हैं। बर्फ से लकदक दिखाई देने वाली चोटियों में भी बर्फ बहुत कम दिखाई दे रही है।


    क्षेत्र की सामाजिक कार्यकर्ती लक्ष्मी देवी ने कहा है कि आदि कैलास यात्रा क्षेत्र में सड़क कट चुकी है, लेकिन अधिकांश हिस्सों में यह अभी कच्ची है। इन दिनों क्षेत्र में बहुत तेज हवायें चल रही हैं। जिस कारण गांवों में रह रहे परिवारों के लिए बाहर निकलना तो दूर घरों में रहना भी मुश्किल हो रहा है। गांवों में लोग बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द बारिश नहीं होने पर लोगों को तमाम दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। इनमें पानी की समस्या प्रमुख होगी। बारिश नहीं होने से पेयजल स्रोतों में पानी कम हो रहा है।

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