बदले जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नियम, अब न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच अनिवार्य
जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है, जिसके तहत निर्धारित समय के बाद आवेदन करने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच अनिवार्य होगी।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़। बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र को हल्के में लेने वाले अभिभावकों की परेशानी अब बढ़ गई है। कभी भी जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेने का चलताऊ तरीका अब काम नहीं आयेगा। निर्धारित समय के भीतर जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाने वालों को प्रथम श्रेणी की न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच के बाद ही प्रमाण पत्र मिल सकेगा।
नई व्यवस्था से जिले में सैकड़ों लोगों के समक्ष परेशानी खड़ी कर दी है। इसमें जिले से बाहर कार्य करने वाले अभिभावक ज्यादा परेशान हैं। अभी तक नगरीय क्षेत्रों में बच्चे के जन्म के 21 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में एक वर्ष तक निशुल्क जन्म प्रमाण पत्र बनाया जाता है।
इस अवधि में किंही कारणों से जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवा सकने वाले अभिभावकों को भी ज्यादा दिक्कत नहीं हाेती थी, उन्हें एक शपथ पत्र और कुछ शुल्क अदा कर जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेने की सुविधा थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आवेदन करना होगा
दो वर्ष तक नगर निकाय क्षेत्र और गांवों से जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवा सकने वाले अभिभावकों को अब जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां आवेदन करना होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट देरी से आवेदन की जांच करवायेंगे। सही कारण प्रमाणित होने के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया शुरू होगी।
नये नियमों से सैकड़ों अभिभावकों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। कई बच्चों के पिता रोजगार के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्य कर रहे हैं। घर पर माताओं के अकेले होने के कारण जन्म प्रमाण पत्र में दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। अब बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराना है, इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में अब अभिभावक तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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दो वर्ष से उम्र के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र अब सीधे जारी नहीं होंगे। इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर से जांच कराई जायेगी, इसी के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में निकाय या ग्राम सभा स्तर से प्रमाण पत्र बनवाने के मामलों में फिलहाल रोक लगाई गई है। - जितेंद्र वर्मा, एसडीएम, पिथौरागढ़
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