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नेपाल में भूस्खलन के बाद चमेलिया नदी में बनी झील, तीन बांधों का पानी भारत में ला सकता है प्रलय

Published: Sat, 05 Sep 2026 12:44 PM (IST)

दार्चुला के अपि हिमाल में भूस्खलन से चमेलिया नदी में झील बन गई है, जिससे भारत-नेपाल सीमा पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

HighLights

  1. दार्चुला में पहाड़ी दरकने से चमेलिया नदी में झील बनी

  2. 15 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, अलर्ट जारी

  3. तीन बांधों के पानी से भारत में भारी तबाही का खतरा

संवाद सूत्र , झूलाघाट। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगे नेपाल के दार्चुला जिले में भारी बारिश के बीच एक बड़ी प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दी है। यहां भट्टाड़ गांव के ऊपर पहाड़ी दरकने से भारी भूस्खलन हुआ है।

पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा सीधे चमेलिया नदी में जा गिरा, जिससे नदी का आधा बहाव रुक गया है और पानी ठहरने लगा है। चमेलिया नदी आगे जाकर काली नदी में मिलती है, इसलिए भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और भारी तबाही का खतरा मंडराने की आशंका बनी है।

तीन बांधों का पानी ला सकता है प्रलय

इस भूस्खलन का सबसे बड़ा खतरा चमेलिया नदी पर बने जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को लेकर है। घटना स्थल से करीब 40 किमी नीचे भारत के गेठीगाड़ा, सिमपानी और नेपाल के सेरा के पास चमेलिया नदी काली नदी में मिलती है।

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इसी 40 किमी के दायरे में चीन की मदद से बलांच में 30 मेगावाट का चमेलिया और 40 मेगावाट का अपर चमेलिया पावर प्रोजेक्ट बन चुका है, जबकि 28 मेगावाट का मध्य चमेलिया प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है।

यदि भूस्खलन से बनी झील टूटती है, तो इन तीनों बांधों का भारी पानी एक साथ काली नदी में आ जाएगा, जिससे झूलाघाट, पंचेश्वर से लेकर टनकपुर तक भारी तबाही मच सकती है।

प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

जिला प्रशासन ने चमेलिया नदी के किनारे रहने वाले सभी निवासियों और तीनों बांधों के कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने का अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है।

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