1971 से आपदा की चपेट उत्तराखंड का दर गांव, अब मकानों के दोनों तरफ भू-धंसाव से दहशत
पिथौरागढ़ का दर गांव 1971 से आपदाग्रस्त है, जहां हाल की बारिश से आंतरिक और संपर्क मार्ग धंस गए हैं, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही ...और पढ़ें
HighLights
दर गांव 1971 से आपदा की चपेट में
बारिश से आंतरिक और संपर्क मार्ग धंसे, आवाजाही बाधित
मकानों के पास भू-धंसाव से ग्रामीणों में दहशत
जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ का दर गांव 1971 से आपदा की चपेट में है। अब धारचूला तहसील में उच्च हिमालयी दारमा घाटी के प्रवेश द्वार दर गांव में बारिश से नुकसान हुआ है। गांव में सभी मकान खतरे में आ गए हैं।
गांव के आंतरिक मार्ग धंस चुके हैं। गांव को जोड़ने वाले मार्ग बह चुके हैं। ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। कुछ मकानों के दोनों तरफ भू-धंसाव हो रहा है। ग्रामीणो में दहशत है।
वहीं लगातार वर्षा से चीन सीमा तक जाने वाली तवाघाट लिपुलेख, चीन सीमा को जोड़ने वाले टनकपुर -तवाघाट हाईवे, तवाघाट - सोबला - तिदाग, मुनस्यारी -धापा - मुनस्यारी मार्ग बंद होने से चीन सीमा का संपर्क कटा है। जिले में 22 मोटर मार्ग बंद है।