Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    केदारनाथ रावल उत्तराधिकारी विवाद: मंदिर समिति और परंपराओं पर उठे सवाल

    Updated: Sat, 14 Mar 2026 03:44 PM (IST)

    केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा परंपरा के विपरीत नांदेड़ में उत्तराधिकारी घोषित करने और रूप छड़ी की मौजूदगी से विवाद खड़ा हो गया है। ...और पढ़ें

    केदारनाथ थाम।

    केदारनाथ थाम।

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ रावल भीमाशंकर लिंग की ओर से परंपरा के विपरीत नांदेड़ में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर उसका पट्टाभिषेक किया जाना और इस समारोह में बाबा केदार की रूप छड़ी की मौजूदगी ने रावल की भूमिका पर तो सवाल खड़े किए ही हैं, मंदिर समिति को भी कटघरे में ला दिया है।

    बड़ा सवाल यह है कि मंदिर समिति के कर्मचारी बिना बोर्ड की मंजूरी के किसकी अनुमति से रूप छड़ी नांदेड़ ले गए।

    हालांकि, इस संबंध में मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कड़ा रुख अपनाया है और प्रकरण से धर्मस्व मंत्री के साथ मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया गया है।

    परंपरा के अनुसार रावल का पद रिक्त होने की स्थिति में ही केदारनाथ धाम के नये रावल की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाती है और इसमें हक-हकूकधारी व दस्तूरदार अहम भूमिका निभाते हैं।

    इसी आधार पर आठ सितंबर 2000 को रावल के पद पर भीमाशंकर लिंग का पट्टाभिषेक किया गया था। दरअसल, 21 सितंबर 1990 को तत्कालीन रावल सिद्धेश्वर लिंग ने गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक चेला दीक्षित करने की अनुमति मांगी थी।

    हालांकि, उन्होंने त्यागपत्र वर्ष 2000 में दिया। इसके बाद रावल पद के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया गया और तीन अभ्यर्थी चयन समिति के समक्ष उपस्थित हुए।

    उनमें से सिद्धेश्वर लिंग के दीक्षित शिष्य भीमाशंकर लिंग को पद के लिए उपयुक्त पाया गया। जबकि, अब रावल भीमाशंकर लिंग ने परंपराओं को दरकिनार कर न केवल अपने उत्तराधिकारी का चयन कर दिया, बल्कि उसका पट्टाभिषेक भी कर दिया गया।

    विवादों में हिमवंत केदार वैराग्य पीठ

    अभिलेखों में उल्लेख है कि मंदिर समिति की भूमि पर ‘हिमवंत केदार वैराग्य पीठ’ का निर्माण किया गया है, जिस पर मंदिर समिति ने आपत्ति जताई है।

    इस पीठ का उल्लेख शीतकालीन पूजा स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के स्थान पर भी हुआ है।

    इसके अलावा फरवरी 2026 में एक निजी कार्यक्रम के दौरान रावल भीमाशंकर लिंग की ओर से अपने शिष्य केदार लिंग को अगला रावल घोषित किए जाने का मामला भी सामने आया था।

    इसे मंदिर अधिनियम के प्रविधानों के विपरीत बताते हुए मंदिर समिति ने नोटिस जारी कर रावल से स्पष्टीकरण मांगा है।

    ईश्वर लिंग प्रकरण

    ईश्वर लिंग की नियुक्ति वर्ष 2016 में स्वयं रावल की संस्तुति पर ‘वीरेश्वर पुजारी’ के रूप में हुई थी। बताया गया कि सात जुलाई 2024 को रावल ने समिति को पत्र लिखकर ईश्वर लिंग को हटाने और उनकी जगह शांत लिंग को नियुक्त करने का प्रस्ताव भेजा, जिसे विवादास्पद माना गया।

    खबरें और भी

    मंदिर समिति ने पाया कि ईश्वर लिंग ने कोविडकाल में भी निष्ठापूर्वक सेवाएं दी और वे वीर शैव जंगम परंपरा सहित सभी पारंपरिक योग्यताओं को पूरा करते हैं।

    इसी कड़ी में बीते 10 मार्च को आयोजित बोर्ड बैठक में समिति ने रावल के विरोध को दरकिनार करते हुए ईश्वर लिंग को रिक्त पुजारी पद पर स्थायी नियुक्ति प्रदान करने का संकल्प पारित किया।

    ऐसे नियुक्त होता है नया रावल

    रावल की मृत्यु अथवा स्वास्थ्य खराब होने की दशा में त्यागपत्र देने पर मंदिर समिति की ओर से चयन प्रक्रिया शुरू की जाती है।

    इसके लिए चयन समिति (जिसमें समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्याधिकारी और अन्य सदस्य शामिल होते हैं) उम्मीदवारों का परीक्षण करती है।

    • रावल के लिए पात्रता: वीरशैव जंगम परंपरा का होना, धार्मिक दीक्षा (दीक्षित चेला), शैव परंपराओं और पूजा-पद्धति का ज्ञान और ब्रह्मचर्य एवं धार्मिक आचार का पालन। चयन के बाद मंदिर समिति की स्वीकृति से रावल की औपचारिक नियुक्ति की जाती है।
    • चयन प्रक्रिया: समाचार पत्रों मे विज्ञप्ति जारी की जाती है, दक्षिण भारत के स्थानीय समाचार पत्रों में भी यह विज्ञप्ति प्रकाशित कर आवेदन मांगे जाते हैं।
    • नियुक्ति की प्रक्रिया: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939 (संशोधित) के प्रविधानों के अनुसार संपन्न होती है। इस अधिनियम के तहत मंदिर के प्रशासन और नियुक्तियों का अधिकार मंदिर समिति को प्राप्त है।

    यह भी पढ़ें- केदारनाथ धाम की परंपरा से छेड़छाड़ का आरोप, BKTC CEO से जवाब-तलब; उपजा एक और विवाद

    यह भी पढ़ें- बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक, BKTC ने पारित किए कई अहम प्रस्ताव