केदारनाथ में अब हाईटेक मशीनों से होगा कचरा प्रबंधन, मास्टर प्लान तैयार
केदारनाथ मंदिर में आगामी यात्रा सीजन के लिए कूड़ा निस्तारण की व्यापक व्यवस्था की जा रही है। इस बार जैविक ...और पढ़ें

HighLights
आधुनिक मशीनों से होगा जैविक कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण।
3.13 करोड़ रुपये की लागत से नई व्यवस्था लागू।
'स्वच्छ धाम–हरित धाम' अवधारणा को प्रभावी बनाना लक्ष्य।
संवाद सहयोगी जागरण, रुद्रप्रयाग। प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर में आगामी यात्रा सीजन को लेकर कूड़ा निस्तारण की व्यापक और वैज्ञानिक व्यवस्था की जा रही है। संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए इस बार नगर पंचायत द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधुनिक मशीनों को लगाया जाएगा।
गत वर्ष केदारनाथ यात्रा के दौरान 21.4 मीट्रिक टन (एमटी) ठोस कचरा उत्पन्न हुआ था। इसमें से 12.1 जैविक (गीला) कचरे को स्थानीय स्तर पर जमीन में दबाकर निस्तारित किया गया, जबकि प्लास्टिक एवं अन्य अजैविक कचरे को एकत्रित कर सोनप्रयाग और रुद्रप्रयाग लाया गया। वहां पृथक्करण के बाद कंपोजिंग एवं डंपिंग की प्रक्रिया अपनाई गई।
केदारनाथ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार, इस वर्ष जैविक कचरे के निस्तारण के लिए वैज्ञानिक तकनीक आधारित गीला कचरा निपटान मशीनें धाम में स्थापित की जाएंगी। इसके लिए 3.13 करोड़ रुपये की लागत से व्यवस्था की जा रही है।
इन मशीनों की मदद से गीले कचरे का तत्काल प्रोसेसिंग कर उसे खाद या अन्य उपयोगी रूप में परिवर्तित किया जाएगा। साथ ही, बेस कैंप क्षेत्र के पास लगभग 1500 फुट क्षमता का नया डंपिंग स्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है, जिससे कचरा प्रबंधन अधिक व्यवस्थित हो सके।
हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ का पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यात्रा सीजन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बड़ी चुनौती बन जाता है।
अधिशासी अधिकारी के अनुसार, गत वर्ष भी अजैविक कचरे को व्यवस्थित रूप से एकत्र कर निचले क्षेत्रों में भेजा गया था, जबकि जैविक कचरे का स्थानीय स्तर पर निस्तारण किया गया। इस बार इसे और अधिक उन्नत व वैज्ञानिक पद्धति से किया जाएगा, जिससे धाम की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित हो सकें।
नगर पंचायत का लक्ष्य है कि यात्रा सीजन के दौरान “स्वच्छ धाम–हरित धाम” की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण मिल सके और केदारनाथ की पवित्रता व प्राकृतिक संतुलन बरकरार रहे।
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