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    केदारनाथ यात्रा पर बड़ा फैसला: पुनर्निर्माण के बावजूद पुराने पैदल मार्ग से आवाजाही को नहीं मिलेगी अनुमति

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 09:24 PM (IST)

    केदारनाथ धाम का पुराना पैदल मार्ग, जिसका 2013 की आपदा के बाद पुनर्निर्माण हुआ है, इस बार की यात्रा के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। मार्ग तैयार होने के ब ...और पढ़ें

    केदारनाथ क लिए रामबाडा से बनाया गया नया पैदल मार्ग  जागरण

    केदारनाथ क लिए रामबाडा से बनाया गया नया पैदल मार्ग  जागरण

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    बृजेश भट्ट, जागरण रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए पुराने केदारनाथ पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण का कार्य भले ही पूरा हो चुका है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं बहाल नहीं होने के कारण आगामी यात्रा सीजन में इससे आवाजाही की प्रशासन अनुमति नहीं देगा।

    वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा में रामबाड़ा से केदारनाथ के बीच यह मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत इसका पुनर्निर्माण कराया गया है।

    रामबाड़ा से गरुड़चट्टी के बीच 5.35 किमी लंबा और 1.8 मीटर चौड़ा पैदल मार्ग बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन इस पर अभी तक पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं बहाल नहीं हो पाई हैं

    ऐसे में प्रशासन ने तय किया है कि यहां से इस बार यात्रा संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विदित हो कि जून 2013 की आपदा में रामबाड़ा से केदारनाथ के बीच पुराना पैदल मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया था।

    ऐसे में यात्रा के संचालन को मंदाकिनी नदी के दाहिने किनारे से नया मार्ग विकसित किया गया। नौ किमी लंबा यह मार्ग रामबाड़ा से भीमबली-लिनचोली-रुद्रा प्वाइंट से होते हुए केदारनाथ धाम को जोड़ता है।

    इस मार्ग पर कई हिमखंड जोन हैं, जहां मई तक बर्फ जमी रहती है, जिससे यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2017 में रामबाड़ा से केदारनाथ तक पुराने पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने की घोषणा की।

    इसके तहत पहले चरण में वर्ष 2019-20 में केदारनाथ से गरुड़चट्टी तक लगभग 3.5 किमी मार्ग का निर्माण किया गया। इस मार्ग को केदारनाथ मंदिर से जोड़ने के लिए मंदाकिनी नदी पर 68 मीटर लंबा स्टील गार्डर पुल वर्ष 2024 में बनकर तैयार हो चुका है।

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    दूसरे चरण में रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक 5.35 किमी लंबे मार्ग का निर्माण किया गया है। हालांकि, लंबे समय तक केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से स्वीकृति न मिलने के कारण इसके निर्माण में देरी हुई।

    इसके बाद 0.983 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण होने पर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की लोनिवि शाखा ने निर्माण कार्य शुरू किया।

    रामबाड़ा से केदारनाथ तक पुराने पैदल मार्ग का निर्माण पूरा कार्य पूरा हो गया है, लेकिन जब तक जरूरी सुविधाएं नहीं जुटा ली जातीं, इससे यात्रा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं की बहाली के लिए छह करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
    प्रतीक जैन, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग

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