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    केदारनाथ यात्रा: आपदा से भव्यता तक का सफर, 13 साल में बदली तस्वीर

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 05:26 PM (GMT+05:30)

    केदारनाथ आपदा के 13 साल बाद यात्रा ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि पुनर्निर्माण और बेहतर प्रबंधन से नई ऊंचाइयों को छुआ है। ...और पढ़ें

    केदारनाथ आपदा के बाद धाम में इस तरह उमड़ रही भक्तों की भीड़। फाइल फोटो

    केदारनाथ आपदा के बाद धाम में इस तरह उमड़ रही भक्तों की भीड़। फाइल फोटो

    HighLights

    1. 2013 की विनाशकारी आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा का पुनरुत्थान

    2. पुनर्निर्माण और बेहतर प्रबंधन से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि

    3. आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा से केदारनाथ यात्रा हुई दिव्य-भव्य

    बृजेश भट्ट, रुद्रप्रयाग। 16-17 जून 2013 की विनाशकारी केदारनाथ आपदा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। तब चौराबाड़ी ताल के टूटने से आए सैलाब ने केदारपुरी को तबाह कर दिया था और कल्पना करना भी मुश्किल था कि केदारनाथ यात्रा फिर से पुराने स्वरूप में लौट पाएगी।

    लेकिन, आपदा के 13 वर्ष बाद केदारनाथ ने न सिर्फ स्वयं को संभाला, बल्कि आस्था, पुनर्निर्माण और बेहतर प्रबंधन की बदौलत यात्रा ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।

    आपदा से पहले जहां प्रतिवर्ष चार से पांच लाख श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन को पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या 20 लाख के आसपास पहुंच जा रही है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के महज डेढ़ महीने में 12 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जो यात्रा के प्रति बढ़ते विश्वास एवं बेहतर व्यवस्थाओं का प्रमाण है।

    kedarnath pilgrimage transformed

    आपदा के बाद वर्ष 2014 और 2015 में यात्रा प्रभावित रही। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सरकार और स्थानीय लोगों ने यात्रा को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए। वर्ष 2019 में पहली बार केदारनाथ यात्रा ने 10 लाख का आंकड़ा पार किया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारपुरी में पुनर्निर्माण कार्यों को गति मिली। केदारपुरी में तीर्थपुरोहितों के लिए 400 से अधिक भवनों का निर्माण कराया गया, जबकि श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक काटेज और आवासीय सुविधाएं विकसित की गईं।

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    kedarnath Dham Work (1)

    आपदा के दौरान रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे कई स्थानों पर बह गया था। अब इसे आलवेदर रोड परियोजना के तहत पुनर्निर्मित किया गया है, जिससे यात्रा पहले की तुलना में सुगम एवं अधिक सुरक्षित हो गई है।

    आपदा के बाद भीमबली से केदारनाथ तक करीब 10 किमी लंबा नया पैदल मार्ग तैयार कर उस पर छोटी लिनचोली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट जैसे नए पड़ाव विकसित किए गए।

    पूरे पैदल मार्ग को तीन से चार मीटर तक चौड़ा कर सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई। विभिन्न पड़ावों पर भोजन, स्वास्थ्य और ठहरने की बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं। वर्तमान में धाम में 10 हजार से अधिक श्रद्धालु ठहरने सकते हैं।

    Tent in kedarnath

    आपदा से पहले जहां धाम में सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब यात्रा मार्ग और धाम में स्वास्थ्य केंद्र, आपातकालीन सेवाएं जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    पुनर्निर्माण, यात्री व्यवस्थाएं, बेहतर हाईवे व पैदल मार्ग, सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था व प्रभावी प्रबंधन के कारण केदारनाथ यात्रा आज देश की सबसे लोकप्रिय तीर्थयात्राओं में शामिल हो चुकी है।

    2013 की त्रासदी से उबरकर केदारनाथ यात्रा ने साबित कर दिखाया है कि आस्था और संकल्प के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

    remarkable change in kedarnath

    वर्षवार केदारधाम पहुंचे श्रद्धालु

    • वर्ष  -  श्रद्धालु
    • 2026 - 12.4 लाख से अधिक (15 जून तक)
    • 2025 - 17,68,795
    • 2024 - 16,52,076
    • 2023 - 19,61,025
    • 2022 - 15,61,882

    वायु सेना की मदद से पहुंचाई गई निर्माण सामग्री

    पुनर्निर्माण कार्यों के लिए केदारपुरी तक भारी निर्माण सामग्री पहुंचाना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन, वायु सेना ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए एमआइ-17 और चिनूक हेलीकाप्टरों के माध्यम से अब तक 850 टन से अधिक निर्माण सामग्री केदारपुरी पहुंचाई है।

    इनमें डंपर, जेसीबी, पोकलेन मशीन और अन्य भारी उपकरण शामिल हैं, जिनकी मदद से कठिन परिस्थितियों में भी पुनर्निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ सके।

    kedarnath Dham In Uttarakhand state

    तीन चरणों में हो रहा पुनर्निर्माण

    • केदारपुरी में लगभग 700 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
    •  प्रथम चरण : लगभग 125 करोड़ की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
    •  द्वितीय चरण : करीब 200 करोड़ के कार्यों में 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
    •  तृतीय चरण : लगभग 225 करोड़ की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
    • इसके अलावा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

    यह हुए केदारपुरी में कार्य

    • मंदिर के पीछे 390 मीटर लंबी त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार का निर्माण
    •  मंदाकिनी और सरस्वती नदी पर घाट व चबूतरों का निर्माण
    •  मंदिर परिसर का चौड़ीकरण और मुख्य मार्ग का विकास
    •  तीर्थपुरोहितों के लिए आधुनिक आवासीय भवन
    •  यात्रियों के लिए काटेज और आवासीय सुविधाएं
    • अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सालय भवन
    •  आदि शंकराचार्य की समाधि का पुनर्निर्माण
    •  सरस्वती और मंदाकिनी नदियों पर सुरक्षा तटबंध
    •  वीआइपी और मुख्य हेलीपैड का निर्माण
    • तीन ध्यान गुफाओं का निर्माण
    •  ईशानेश्वर मंदिर का निर्माण
    •  हाट बाजार और सार्वजनिक सुविधाओं का विकास
    •  गरुड़चट्टी को जोड़ने वाले पुल और पैदल मार्ग का निर्माण
    • सीवर लाइन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार

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