केदारनाथ यात्रा शुरू होने में बस 10 दिन, बर्फ से ढके धाम में होगा भक्ति और रोमांच का अद्भुत संगम
अप्रैल में भारी बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम पूरी तरह बर्फ से ढका है। यात्रा शुरू होने में 10 दिन शेष हैं, भक्त बाबा केदार के दर्शन के साथ बर्फीले हि ...और पढ़ें

श्रद्धालुओं को बाबा केदार दर्शन के साथ-साथ बर्फीले हिमालय के अद्भुत सौंदर्य देखने को मिलेगा.

समय कम है?
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बृजेश भट्ट, रुद्रप्रयाग। इस वर्ष अप्रैल माह में हुई बर्फबारी ने केदारनाथ धाम को पूरी तरह सफेद चादर से ढ़क दिया है। यात्रा शुरू होने में अब मात्र 10 दिन शेष हैं। ऐसे में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बाबा केदार के दर्शन के साथ-साथ बर्फीले हिमालय के अद्भुत सौंदर्य को देखने का भी मौका मिलेगा।
हालांकि केदारनाथ तक जाने वाला पैदल मार्ग आवाजाही के लिए खोल दिया गया है, लेकिन यह मार्ग बर्फ को काटकर तैयार किया गया है। जगह-जगह कई फीट ऊंची बर्फ की दीवारें श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए खड़ी हैं, जो इस यात्रा को न केवल चुनौतीपूर्ण बनाती हैं बल्कि रोमांच से भी भर देती हैं।
तीन से चार फीट तक जमी बर्फ
केदारनाथ धाम में इस बार मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में तीन से चार फीट तक बर्फ जमी हुई है। वहीं, लिनचोली से रुद्र प्वाइंट होते हुए केदारनाथ तक का मार्ग पूरी तरह बर्फीले पहाड़ों के बीच से गुजर रहा है। कई स्थानों पर बर्फ की परतें 15 से 20 फीट तक ऊंची हैं, जिन्हें काटकर संकरे रास्ते बनाए गए हैं।
यात्रा के शुरुआती दो से तीन सप्ताह श्रद्धालुओं के लिए खास रहने वाले हैं। इस दौरान वे भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ बर्फ से ढके पहाड़ों, घाटियों और मनोरम दृश्यों का आनंद ले सकेंगे। बर्फ में पैदल चलना जहां एक ओर कठिनाई भरा अनुभव है।
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वहीं दूसरी ओर यह एक रोमांचकारी एहसास भी देता है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रा के शुरुआती दिनों में बर्फ होना नई बात नहीं है। वर्ष 2015, 2019 और 2022 में भी यात्रा मार्ग पर मोटी बर्फ जमी थी और प्रशासन द्वारा बर्फ काटकर रास्ता तैयार किया गया था। हालांकि इस बार खास बात यह है कि मई महीने तक भी श्रद्धालु बर्फ से ढके रास्तों का आनंद ले सकेंगे।
प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिक शांति का यह अद्भुत संगम श्रद्धालुओं को एक अलग ही अनुभूति देगा। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच से गुजरते हुए जब भक्त केदारनाथ मंदिर पहुंचेंगे, तो उनके लिए यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब पहुंचने का भी एक अनमोल अवसर होगा।
इस प्रकार, केदारनाथ यात्रा 2026 श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा मेल साबित होगी, जहां हर कदम पर आस्था के साथ-साथ हिमालय की भव्यता का अहसास भी होगा।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर लिनचोली से लेकर केदारनाथ तक लगभग छह किलोमीटर तक बर्फ काटकर रास्ता तैयार किया गया है धाम में लगातार मौसम ठंडा बना हुआ है। यात्रा के शुरूआती दिनों में पैदल मार्ग पर बर्फ जमी रहेगी। - राघवेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता डीडीएमए
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