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    नगरासू गुरुद्वारे का गतिरोध खत्म: नाचते हुए पुलिस फोर्स के सामने रवाना हुए पांचों निहंग

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 09:20 PM (IST)

    नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में चार दिनों से चल रहा निहंगों का विवाद शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया, जिसके बाद निहंग पंजाब रवाना हो गए। ...और पढ़ें

    रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में कब्जा जमाए निहंगों से वार्ता के लिए मंगलवार को पंजाब से पहुंचा दल। वहीं, मंगलवार शाम मोटरसाइकिल से रवाना होते निहंग। जागरण

    रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में कब्जा जमाए निहंगों से वार्ता के लिए मंगलवार को पंजाब से पहुंचा दल। वहीं, मंगलवार शाम मोटरसाइकिल से रवाना होते निहंग। जागरण

    HighLights

    1. नगरासू गुरुद्वारा में चार दिन चला निहंगों का विवाद समाप्त

    2. निहंग बिना कार्रवाई के पुलिस के सामने पंजाब रवाना

    3. स्थानीय लोग पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता पर उठा रहे सवाल

    संवाद सहयोगी, रुद्रप्रयाग। नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में पिछले चार दिनों से चल रहे विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के बाद चारों निहंग बाहर निकल आए।

    इसके बाद एक दिन पहले बाहर आया और मंगलवार को बाहर आए चारों निहंग नाचते हुए पुलिस फोर्स के सामने मोटरसाइकिल से पंजाब के लिए रवाना हो गए।

    इससे जहां एक ओर तनावपूर्ण स्थिति सामान्य हुई, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों में पुलिस और सरकार के रवैये को लेकर नाराजगी है।

    क्षेत्रवासियों का आरोप है कि चार दिनों तक चले घटनाक्रम के दौरान गुरुद्वारा परिसर में तनाव, तोड़फोड़ और भय का माहौल बना रहा, लेकिन इसके बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

    वहीं स्थानीय लोगों ने निर्णय लिया है कि इस संबंध में शीघ्र ही जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से भेंट कर तहरीर सौंप जाएगी।

    नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से निहंगों के हंगामे के दौरान पुलिस, आइटीबीपी और अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।

    गुरुद्वारा प्रबंधक बेहंत सिंह ने भी परिसर में तोड़फोड़, अव्यवस्था और अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बावजूद विवाद समाप्त होने के बाद निहंग सिखों को बिना किसी कार्रवाई के रवाना कर दिया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    स्थानीय निवासी गौरव चौधरी ने कहा कि घटनाक्रम के दौरान पुलिस पर पथराव किया गया और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी किया गया। चार दिनों तक पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, लेकिन इसके बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

    कहा कि यह घटनाक्रम आम जनता के लिए अलग और विशेष परिस्थितियों में अलग कानून लागू होने का संदेश देता है। इस मामले में शीघ्र क्षेत्र का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक से भेंट कर इस घटनाक्रम को लेकर तहरीर सौंपेगा।

    वहीं सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी ने कहा कि निहंगों ने पूरे क्षेत्र में तांडव मचाया और गुरुद्वारे पर कब्जा किया और प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। सरकार को इसका जवाब जनता को देना होगा।

    गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने भी इस घटनाक्रम को लेकर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए हैं।

    कहा कि यदि पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल मौके पर मौजूद थे तो मामले का समाधान पहले ही क्यों नहीं किया गया। चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा करके रखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल रहा।

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    विवाद शांत होने के बाद बिना किसी कानूनी कार्रवाई के संबंधित लोगों को वापस भेजना सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

    वहीं क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि जब स्थानीय नागरिक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन या प्रदर्शन करते हैं तो उनके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, जबकि इतने बड़े विवाद के बाद भी कोई स्पष्ट कानूनी कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    ऐसे में प्रशासन को पूरे प्रकरण की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके और कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे।

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